Hindi NewsMadhurimaStory Of Pratibha Paranjpe Povertyइस मोड़ से जाते हैं प्रतियोगिता: प्रतिभा परांजपे की कहानी- तंगहालीप्रतिभा परांजपे 18 घंटे पहलेकॉपी लिंककिसी भी राह के लिए मोड़ एक नई दिशा का ज़रिया बनते हैं, कुछ वैसी ही है यह प्रतियोगिता- इस मोड़ से जाते हैं, जिसमें दी गई अधूरी कहानी को पाठकों ने दिलचस्प मोड़ देकर पूरा किया। पढ़ें इस प्रतियोगिता की प्रशंसनीय कृति।शर्बरी सुबह घर के पास के पार्क में टहलने जा रही थी, जहां रोज़ की तरह उसकी मुलाक़ात विशी, पाखी और शन्मुखा से हुई।चारों बतियाती हुई पार्क के चहलक़दमी के लिए बने पथ पर पहुंचीं और जैसा कि चारों ने नियम बना रखा था कि टहलते समय बातें नहीं करेंगे, चारों लगभग एक-सी गति से ख़ामोशी से चलने लगीं।यकायक पाखी ने तीनों से कहा, ‘कालिंदी दीदी को क्या हो गया है? बड़ा अजीब बर्ताव किया कल उन्होंने।’नियम के विरुद्ध विशी भी बोल पड़ी, ‘हां, कुछ चुपचुप-सी थीं। हमेशा कैसे खिलकर मिलती हैं, कल मुझे भी सीढ़ियों पर मिलीं, तो ज़रा-सा सिर हिलाकर मेरी हैलो का जवाब दिया और चली गईं।’चारों अब रुककर बातें कर रही थीं।शर्बरी ने कंधे उचकाते हुए कहा, ‘उनके घर में तो कोई है भी नहीं, अकेली रहती हैं, तबियत भी ठीक है, पूरी बिल्डिंग को जानती हैं, सारे बच्चे, बड़े, हम-सब उनसे मिलते-जुलते रहते हैं। फिर अचानक हमसे कतराने की वजह?’तभी शन्मुखा ने जो कहा, उसे सुनकर वे तीनों चुप हो गईं, ‘तीन साल हो गए कालिंदी दीदी को यहां रहते हुए। वो हम सबको जानती हैं, पर हम कितना जानते हैं उन्हें, उनके सुख-दुख को? वो प्राइवेट फर्म में नौकरी करती हैं, बस इतना ही ना?’इसके बाद चारों तक़रीबन समवयस स्त्रियां कालिंदी के बारे में अपनी सीमित जानकारी के चलते केवल अंदाज़े लगाने को विवश थीं।क्या हो सकती थी हरदम ख़ुश रहने वाली कालिंदी की उदासी, चुप्पी की वजह? चारों सहेलियां कालिंदी के व्यवहार को लेकर आपस में बातें कर रही थीं। सभी अपने अपने अनुभव से कयास लगा रही थीं। परन्तु वापसी में पाखी अपने घर न जाकर कालिंदी के घर पहुंची तो देखा वो फोन पर किसी से नए मकान के बारे में बात कर रही थी । ‘कहो पाखी आज मॉर्निंग वॉक पर नहीं गईं?’‘गई थी दीदी ,पर काफी दिनों से हम सब यह महसूस कर रहे हैं कि आप कुछ अनमनी सी रहने लगी हैं, हमेशा हंसने बोलने वाला अगर अचानक चुप्पी साध ले तो चिंता हो जाती है। क्या बात है दीदी अगर बताना चाहो तो?’‘हां, बताना तो पड़ेगा, क्या है 3 साल हो गए यहां रहते हुए आप सब के साथ वक्त खूब अच्छे से गुज़रा। पर अब मकान मालिक किराया बढ़ा रहा है, मैं उतना नहीं दे पाऊंगी। मेरी एक प्राइवेट फर्म मे नौकरी है और चार-पांच वर्ष बाद सेवानिवृत्ति भी मिलनी है। परंतु अभी वहां पर भी छंटनी शुरू हो रही है इस वजह से एक चिंता है, तो खर्चे सीमित करने की कोशिश में हूं।’ ‘दीदी, आपके रिश्तेदार?’‘हैं ना, पर चूंकि मैंने विवाह नहीं किया तो अकेले रहना पसंद करती हूं, अपने दम पर। यहां आप सबसे इतने हिलमिल गई थीं कि एक परिवार जैसा माहौल पाया अब सब छोड़कर जाने का सोच कर मन उदास है बस, बाकी कुछ नहीं।’घर जाते समय पाखी सोच रही थी हमेशा हंसने-बोलने वाली कालिंदी दीदी, मन के अंदर क्या क्या दुःख, चिंता समेटे हैं, ये तभी पता चला जब हम उनके नजदीक पहुंचे, वरना दूर से तो किसी के दिल में क्या दुख, परेशानी है यह समझ में नहीं आ सकता है।
Source: Dainik Bhaskar June 06, 2023 02:33 UTC