डिजिटल डेस्क,शहडोल। चुनाव के समय सत्ता में आने के लिए किए जा रहे फ्रीबीज जैसे वादों से देश का नुकसान हो रहा है। मैं फ्रीबीज के खिलाफ हूं। इन सब बातों से आप देश को नष्ट कर दोगे। देश की इकॉनामी नष्ट कर दोगे। राज्यसभा सांसद और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने ये बातें दैनिक भास्कर से खास बातचीत कही।उन्होंने कहा कि आदिवासी अंचल पिछड़े हुए हैं तो वहां विकास के लिए ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। पर अफसोस की सरकार का ध्यान इस दिशा में नहीं है।आप सीएम होते तो माफिया से कैसे निपटते? मैं सीएम होता तो रेत माफिया वैसे ही भाग जाता। क्योंकि मुझे पता है कि माफिया को इंटटेन करना सामाजिक अपराध है। फिर बात रेत माफिया की हो, शराब माफिया, कोयला माफिया या भू-माफिया की। मैं ये देख रहा हूं की आजकल सरकारें माफिया के माध्यम से चलती है। ये माफिया के लोग चुनाव लड़ते हैं, जनप्रतिनिधि बनते हैं। जब तक मानसिक परिवर्तन नहीं आएगा, इन लोगों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई नहीं होती तब कोई बदलाव नहीं आएगा।कार्रवाई में प्रशासन क्यों फेल हो रहा? प्रशासन तो वैसे भी कमजोर होता है। प्रशासन के लोग अगर माफिया के सामने घुटने टेक रहे हैं तो मान सकते हैं कि उन्हे उपर से सपोर्ट नहीं मिल रहा है। ये लोग उपर से डर रहे हैं। यहां रेत व कोयला चोरी जिस स्तर पर हो रही है तो क्या प्रशासन देख नहीं सकता है। अब समय आ गया है। अगर प्रशासन कुछ नहीं करेगा तो न्यायालय में जाकर हमको कोर्ट से आदेश लेना पड़ेगा।शहडोल जैसे क्षेत्र में विकास के लिए क्या जरूरी है? आदिवासी अंचल में विकास के लिए तीन चीजें जरूरी है। स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार। जिस परिवार को ये तीनों चीजें मिल जाएगी वह परिवार सुखी हो जाएगा। एजुकेशन सिस्टम तो इसटेब्लिस्ट हुए हैं पर शिक्षा को रोजगार से नहीं जोड़ा जा सका।हेल्थ केयर जिस लेबल का होना चाहिए, वैसा नहीं हो पा रहा है। हम इसलिए ही आदिवासी अंचल में राहत हेल्थ शिविर लगाते हैं। क्योंकि भोपाल, इंदौर, जबलपुर में तो कोई भी बेहतर इलाज करवा लेगा पर मंडला, शहडोल मेें संभव नहीं है।शहडोल में एयरपोर्ट का मुद्दा आपने राज्यसभा में उठाया, यह निर्माण मोदी की गारंटी शामिल है फिर काम प्रारंभ नहीं हुआ? केंद्र सरकार ने शहडोल को रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम उड़ान योजना में शामिल किया है। राज्य सरकार का दायित्व है कि यहां एयरपोर्ट बनवाए। चुनाव के समय बड़े-बड़े विज्ञापन में वादा करना अलग बात है और उन वादों का क्रियान्वयन अलग बात।आप वादा कर रहे हैं तो उसे पूरा करने का उद्देश्य भी होना चाहिए। गारंटी के बाद भी काम पूरा नहीं हो रहे तो लोगों को धोखे में रखा जा रहा है। मैं तो चुनाव में झूठे वादों के खिलाफ हूं।


Source:   Dainik Bhaskar
March 16, 2026 17:21 UTC