हाईकोर्ट ने काशीपुर में सीलिंग की भूमि को धोखाधड़ी से बेचे जाने के मामले को गंभीरता से लिया है।उत्तराखंड हाईकोर्ट ने काशीपुर में सीलिंग की भूमि को धोखाधड़ी से बेचे जाने के मामले को गंभीरता से लिया है। न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने ऊधमसिंह नगर के जिलाधिकारी को उन अधिकारियों के खिलाफ विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया है, जिनकी लापरवाही के. मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने सवाल उठाया कि जब भूमि एक बार 'सरप्लस' (अधिशेष) घोषित कर दी गई थी, तो राजस्व अभिलेखों में इसका अंकन क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने इसे एक गंभीर स्थिति माना है।याचिकाकर्ता लक्ष्मी देवी के अनुसार, बीना और जसवंत सिंह ने काशीपुर के खसरा नंबर 13 मीन की 0.418 हेक्टेयर भूमि का विक्रय विलेख आवेदक के पक्ष में निष्पादित किया था। हालांकि, यह भूमि 'उत्तर प्रदेश अधिरोपण और भूमि जोत सीमा (संशोधन) अधिनियम, 1972' के तहत पहले ही सरप्लस घोषित की जा चुकी थी।कोर्ट के संज्ञान में यह भी लाया गया कि उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) काशीपुर द्वारा आरोपी बीना को नोटिस जारी कर स्पष्ट किया गया था कि वह इस भूमि पर अवैध रूप से काबिज है। इसके बावजूद, तथ्यों को छुपाकर जमीन बेच दी गई।सुनवाई के दौरान आरोपी व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित हुए। बीना ने मामले में अनभिज्ञता जाहिर की, जबकि जसविंदर सिंह ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए याची लक्ष्मी को कोर्ट में ही 6 लाख रुपये का चेक सौंपा।न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सरकारी तंत्र की विफलता के बिना ऐसी धोखाधड़ी संभव नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उन दोषी अधिकारियों की पहचान की जानी चाहिए जिन्होंने अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं किया और राजस्व रिकॉर्ड को अपडेट नहीं होने दिया। हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर को चार सप्ताह के भीतर जांच पूरी कर अपनी अनुपालन रिपोर्ट अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है।मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल, 2026 को तय की गई है। साथ ही, कोर्ट ने अन्य प्रतिवादियों को भी अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।


Source:   Dainik Bhaskar
March 11, 2026 19:52 UTC