अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अपूर्वा की कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करना चाहती हैं. अपूर्वा ने न सिर्फ खुद सफलता हासिल की, बल्कि कई जरूरतमंद महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने का मौका दिया. छोटी दुकान से शुरू हुआ कारोबारअपूर्वा ने कोरोना महामारी के दौरान मात्र 10 हजार रुपए की पूंजी से अपना व्यवसाय शुरू किया. जरूरतमंद महिलाओं को दिया नया जीवनअपूर्वा की सफलता की खास बात यह है कि उन्होंने अपने व्यवसाय के जरिए कई महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाया. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर अपूर्वा की यह कहानी बताती है कि छोटे से कदम से भी बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है.