डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह गंगा नदी के किनारों और बाढ़ के मैदानों पर हुए अवैध निर्माणों पर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करे और अतिक्रमण हटाने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी भी दे।जस्टिस जे.बी. विश्वनाथन की पीठ ने केंद्र सरकार से गंगा के पुनरुद्धार, संरक्षण और प्रबंधन से संबंधित अधिसूचना के कार्यान्वयन और निष्पादन के लिए अब तक उठाए गए कदमों को रिकॉर्ड पर रखने को कहा। 'कैसे मुक्त होगा गंगा किनारे का अतिक्रमण?' ऊपर बताए गए सभी राज्यों से होकर बहने वाली गंगा नदी की सुरक्षा के लिए अथॉरिटी क्या कदम उठाने का इरादा रखती है और यह सुनिश्चित करने के लिए क्या करेगी कि नदी के मैदान और किनारे सभी तरह के अतिक्रमणों से मुक्त हों?" अदालत ने गंगा बेसिन के कई राज्यों को नोटिस जारी किए और कहा कि इस मुद्दे के लिए अलग-अलग मामलों से परे एक व्यापक जांच की आवश्यकता है। यह मामला अगली सुनवाई के लिए 23 अप्रैल को सूचीबद्ध है। याचिकाकर्ता के वकील ने क्या कहा? सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील आकाश वशिष्ठ ने दलील दी कि नदी के किनारों पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण है, जिस पर तत्काल ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि नदी के इन किनारों के कुछ हिस्सों में ताजे पानी की डॉल्फिन बड़ी संख्या में पाई जाती हैं।सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से यह भी जानना चाहा कि गंगा नदी के मैदानी इलाकों और किनारों को सभी तरह के अतिक्रमणों से पूरी तरह मुक्त करने वाली अधिसूचना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्राधिकरण इस अदालत से किस तरह के निर्देश चाहता है।


Source:   Dainik Jagran
March 15, 2026 18:08 UTC