जिसमें कई अभ्यर्थियों की भर्ती शन्यू अंक के बाद भी हुई थी. इस भर्ती में शून्य या माइनस अंक लाने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार से सख्त सवाल किए हैं. जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने कहा कि न्यूनतम अंक निर्धारित न करने से योग्यता का कोई मानक ही बच नहीं जाता. बोर्ड ने शून्य अंक वालों को चयनित किया, फिर भी पद खाली रहने पर माइनस अंक वालों को भी नियुक्ति देने का तर्क दिया. अधिवक्ता हरेन्द्र नील ने कहा कि विज्ञप्ति में न्यूनतम अंक निर्धारित नहीं हैं, इसलिए जीरो और माइनस में कोई फर्क नहीं.


Source:   NDTV
March 09, 2026 13:43 UTC