डिजिटल डेस्क, नोएडा। मिर्जापुर के लोगों के लिए जागरण न्यू मीडिया और विश्वास न्यूज के सहयोग से गूगल के प्रतिष्ठित 'डिजीकवच' पहल के अंतर्गत "वरिष्ठ नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा: सच के साथी" वर्कशॉप का आयोजन किया गया। 6 मार्च 2026 (शुक्रवार) को हुए इस वेबिनार का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को ऑनलाइन धोखाधड़ी और स्कैम्स से सुरक्षित रखते हुए उन्हें बचाव के तरीकों के बारे में जागरूक करना था।कार्यक्रम में विश्वास न्यूज की प्रशिक्षक एवं डिप्टी एडिटर पल्लवी मिश्रा ने बताया कि ऑनलाइन ठगी के मामले हर साल बढ़ रहे हैं। वरिष्ठ नागरिकों को ठग अधिक निशाना बनाते हैं। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल लोगों को स्कैम्स और फ्रॉड के विभिन्न तरीकों की जानकारी देते हुए उनसे बचाव के उपायों के बारे में जागरूक किया। उन्होंने कहा कि त्योहारों के समय साइबर अपराधी अक्सर लुभावने संदेशों के साथ फिशिंग लिंक भेजते हैं। इनसे बचने का सबसे सुरक्षित तरीका है कि ऐसे किसी भी लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए।लोगों को मजबूत पासवर्ड की अहमियत बताते हुए पल्लवी मिश्रा ने कहा कि स्कैमर्स आसान पासवर्ड को आसानी से हैक कर लेते हैं। इससे यूजर का अकाउंट सुरक्षित नहीं रहता है। उन्होंने कहा कि गूगल और सोशल मीडिया अकाउंट को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत पासवर्ड बनाना चाहिए। इसके लिए 'गूगल पासकी' एक आसान और सुरक्षित विकल्प है।उन्होंने एआई की मदद से होने वाली ऑनलाइन धोखाधड़ी के बारे में लोगों को बताया। मिश्रा ने कहा कि आजकल सेलेब्रिटीज के कई वीडियो वायरल होते हैं, जिनमें उन्हें लोगों को इन्वेस्टमेंट करने के लिए कहते हुए उन्हें देखा जाता है। ये सब साइबर अपराधियों का तरीका होता है, जो एआई जेनरेटेड डीपफेक वीडियो के जरिए लोगों को फंसाने की कोशिश करते हैं। हड़बड़ी में अगर कोई पैसा लगाने के लिए उकसाए, तो सतर्क हो जाना चाहिए।मिर्जापुर के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में 'विंध्य फाउंडेशन ट्रस्ट' का सहयोग रहा। इसके संस्थापक आशुतोष कुमार ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे आज की जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई भी ठगी होने पर पुलिस को रिपोर्ट जरूर करना चाहिए और साथ ही जानकारों को सतर्क भी करना चाहिए।कार्यक्रम के बारे में'वरिष्ठ नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा: सच के साथी' अभियान के तहत दैनिक जागरण डिजिटल और विश्वास न्यूज की टीमें देशभर में सेमिनार और वेबिनार के माध्यम से ट्रेनिंग दे रही हैं।इसके तहत देश के 20 राज्यों के 30 शहरों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। गुजरात के अलावा दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, महाराष्ट्र, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, पंजाब और उत्तराखंड जैसे 20 राज्यों में इस तरह का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसमें लोगों को ऑनलाइन स्कैम को पहचानने और बचने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।