मुकेश ठाकुर, पश्चिमी दिल्ली। दिल्ली की भारी भीड़ और तेज रफ्तार के बीच 500 रुपये बचाने के चक्कर में 1000 रुपये का चालान और अपनी जिंदगी को जोखिम में डालना समझदारी नहीं है। वहीं, हाल ही में द्वारका साउथ थाना क्षेत्र और पंजाबी बाग में हुई दुर्घटनाओं ने एक भयावह सच सामने रखा है। द्वारका साउथ थाना क्षेत्र में हुई सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले साहिल ने हेलमेट पहना था या नहीं, यह अभी जांच का विषय है।सिर पर हेलमेट रख लेना ही काफी नहीं बता दें कि अभी तक की छानबीन में जो बातें पता चली हैं, उसके अनुसार उनके सिर में गंभीर चोटें आई थीं। इस हादसे में जान गंवाने वाले युवक साहिल के सिर में आई गंभीर चोटें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या सिर्फ सिर पर हेलमेट रख लेना ही काफी है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हेलमेट सही गुणवत्ता का हो और उसकी स्ट्रैप (फीता) सही तरीके से लगी हो, तभी वह जान बचाने में सक्षम होता है। दुर्घटना और फोरेंसिक जांच के संकेत साहिल की दुर्घटना के मामले में फोरेंसिक विशेषज्ञों ने तीन प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया है, जो हर दोपहिया सवार के लिए सबक है। इम्पैक्ट फोर्स: टक्कर के समय हेलमेट पर लगने वाला दबाव कितना था। यदि बल बहुत अधिक हो, जैसे किसी भारी वाहन का टायर ऊपर से गुजर जाना, तो कोई भी सुरक्षा कवच विफल हो सकता है।टक्कर के समय हेलमेट पर लगने वाला दबाव कितना था। यदि बल बहुत अधिक हो, जैसे किसी भारी वाहन का टायर ऊपर से गुजर जाना, तो कोई भी सुरक्षा कवच विफल हो सकता है। मैटेरियल की गुणवत्ता: हेलमेट किस सामग्री से बना है, यह सबसे अहम है। घटिया प्लास्टिक या कम गुणवत्ता वाला मैटेरियल झटके को बर्दाश्त नहीं कर पाता।हेलमेट किस सामग्री से बना है, यह सबसे अहम है। घटिया प्लास्टिक या कम गुणवत्ता वाला मैटेरियल झटके को बर्दाश्त नहीं कर पाता। पहनने का तरीका: अक्सर लोग हेलमेट पहनते तो हैं, लेकिन उसकी स्ट्रैप नहीं बांधते। झटका लगते ही हेलमेट सिर से अलग होकर दूर जा गिरता है और सिर असुरक्षित रह जाता है। दिल्ली में लापरवाही का डरावना आंकड़ा दिल्ली के लोग हेलमेट को लेकर कितने लापरवाह हैं, इसका अंदाजा दिल्ली यातायात पुलिस के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। वर्ष 2025 में अगस्त महीने तक बिना हेलमेट के कुल 4.16 लाख चालान किए गए। इनमें से 4.11 लाख लोग ऐसे हैं, जिन्होंने जुर्माना तक नहीं भरा था।यातायात पुलिस के अनुसार, वर्ष 2025 में दिल्ली में लगभग 468 दोपहिया सवारों की मौत हुई, जिनमें से अधिकांश की जान हेलमेट न पहनने या घटिया हेलमेट के कारण गई। लोग अक्सर चालान से बचने के लिए क्रिकेट हेलमेट जैसे विकल्पों का इस्तेमाल करते हैं, जो सड़क हादसों के लिए बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं हैं।जोखिम को 42 प्रतिशत तक कम करता है हेलमेट विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, हेलमेट का सही उपयोग मृत्यु के जोखिम को 42 प्रतिशत और गंभीर चोट के जोखिम को 69 प्रतिशत तक कम कर सकता है। आइआइटी का एक अध्ययन बताता है कि लोग अक्सर स्टाइल खराब होने या गर्मी का बहाना बनाकर हेलमेट नहीं पहनते। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि 40 प्रतिशत हादसे घर के महज पांच किलोमीटर के दायरे में होते हैं, जहां लोग पास में ही जाना है कहकर लापरवाही बरतते हैं।