कांग्रेस संसद में करेगी नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध

कांग्रेस संसद में नागरिकता (संशोधन) विधेयक का पुरजोर विरोध करेगी. लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी ने रविवार को पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के 10 जनपथ आवास पर कांग्रेस संसदीय रणनीतिक समूह की बैठक के बाद यह बयान दिया. उन्होंने कहा, ‘हम इस विधेयक का पूरी ताकत से विरोध करेंगे क्योंकि यह संविधान विरोधी और धर्मनिरपेक्षता विरोधी है.' उन्होंने कहा कि बैठक में निर्णय किया गया कि पार्टी बलात्कार के मामले और उन्नाव में महिला को जलाने की घटना को भी संसद में उठाएगी. पार्टी देश के विभिन्न हिस्से में महिलाओं पर हमले के मुद्दे को भी उठाएगी.केंद्रीय मंत्री अमित शाह सोमवार को लोकसभा में विधेयक पेश करेंगे.

Source:NDTV

December 08, 2019 21:00 UTC


Delhi News In Hindi : It is easy to tell the reason for the short circuit, even in 60 percent of cases of fire, scientific investigation is necessary.

भास्कर ने दिल्ली फायर सर्विस के तीन पूर्व निदेशकों से पूछा कि कैसे रुकेंगे हादसे, सबने व्यवस्था सुधारने पर दिया जोरDainik Bhaskar Dec 09, 2019, 02:18 AM ISTअखिलेश कुमार | नई दिल्ली . दिल्ली में आग लगने की सिद्धार्थ होटल में 37, उपहार सिनेमा 59, लाल कुआं 57 सहित हौजखास रेस्तरां, बवाना फैक्ट्री, अर्पित होटल व गेस्ट हाउस में आग की बड़ी घटनाएं हुईं। पुरानी दिल्ली के तिलक बाजार, नया बाजार, खारी बाबली और लाल कुआं के बाद अब अनाज मंडी की घटनाओं को जोड़ लें तो अकेले पुरानी दिल्ली की पांच अग्निकांड में 145 की जान जा चुकी है।आग की घटनाओं से क्या सबक सीखे और कहां चूक का नुकसान दिल्ली को उठाना पड़ रहा है। भास्कर ने दिल्ली फायर सर्विसेज में 25-28 साल तक काम करने वाले तीन पूर्व निदेशकों से बातचीत की। इन्होंने बताया कि जब जिस तरह के एस्टैबलिशमेंट में आग लगती है, उसके नियम बदल जाते हैं। बाकी तरह ध्यान नहीं जाता।उपहार सिनेमा में आग लगी तो सिनेमैटोग्राफी रूल्स बदले गएउपहार सिनेमा में आग लगी तो सिनेमेटोग्राफी रूल्स बदले गए। जहां एक साल में आग सुरक्षा की जांच अकेला एक व्यक्ति कर आता था, उसे एक साल में 4 बार पूरी टीम के साथ करना अनिवार्य बनाया गया। सिद्धार्थ होटल में आग लगी तो होटलों में पड़ताल बढ़ी। मॉल या नर्सिंग होम सहित कुछ अन्य प्वाइंट पर आग पर अभी बड़ा हादसा नहीं हुआ तो वहां के नियम पर सख्ती नहीं है। शॉर्ट शर्किट से आग कह देना आसान है तो लोग ऐसा कहते हैं। हालांकि 60% मामले शॉर्ट सर्किट से ही होते भी हैं। लेकिन साइंटिफिक जांच जरूरी है। काम करना और सोना एक ही जगह और वो भी सामान के साथ तो फिर आग में दम तो घुटेगा ही।पुरानी दिल्ली को गिरा तो नहीं सकते, ऑडिट करके सुरक्षा जरूरीउपहार हादसा हुआ तो मैं फायर डिविजन अफसर था। पीरागढ़ी आग में 9 मरे और फिर कई हादसे हुए। हादसे जागरुकता से ही रुकेंगे। फायर डिपार्टमेंट बता सकता है लेकिन सोसायटी को मंजूर बिजली लोड से ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना, मजबूत वायरिंग, सीढ़ी खाली रखना ध्यान रखना पड़ेगा। पुरानी दिल्ली को गिरा तो नहीं सकते। ऑडिट करके सुरक्षा जरूरी। दुकान-घर-फैक्ट्री सब वहीं है तो ध्यान देने की जरूरत इन्हें ज्यादा है। इलेक्ट्रिक, प्लास्टिक, रैक्सिन सब काम होता है। गलियां तंग हैं, वायरिंग पुरानी है। फायर को पहुंचने में टाइम लगता है, टाइम लगे तो दम घुटने से मौत भी ज्यादा होगी, आग में फैलेगा।इमारत नहीं, सुरक्षा के लिहाज से बनाने होेंगे सख्त कानूनजब जिस तरह की इमारत में आग लगती है, उसके लिए कानून बदलते हैं। उपहार, हौजखास रेस्तरां, अंसल भवन अाग घटना में कानून बदले। 2010 में दिल्ली फायर रूल्स 27 में 15 मीटर की बजाय 9 मीटर तक के भवन में इसमें शामिल किए। इससे पहले 1983 में बिल्डिंग बाइलॉज बदले, 1987 में रूल्स बने जिसमें कहा गया था कि 15 मीटर से ऊंची इमारत फायर एनओसी के दायरे में आएंगी। फिर 2007 में भी कानून बदला फिर 2010 में फायर सर्विसेज का रूल बदला। पुरानी दिल्ली पर फायर रूल्स लागू नहीं होते क्योंकि यहां मुगलकाल, अंग्रेजी शासन काल और आजादी के बाद के भी मकान हैं।

December 08, 2019 20:48 UTC


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