नीतीश कुमार ने गुरुवार को X पर पोस्ट कर राज्यसभा जाने का ऐलान किया है। उन्होंने बिहार में नई सरकार को अपना पूरा सहयोग करने की भी बात कही है। अब यह भी तय हो गया कि बिहार में अब नीतीश युग का अंत हो गया। साथ ही अब इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि नीतीश. क्या पहली बार बिहार में बीजेपी का CM बनेगा? क्या नीतीश के किसी करीबी को CM बनाया जाएगा। क्या 4 दशक बाद बिहार को सवर्ण CM मिल सकता है..? बिहार में CM की रेस में सबसे आगे सम्राट चौधरी का नाम चल रहा है। विजय चौधरी भी चर्चा में हैं। इधर, BJP EBC या OBC चेहरा लाकर चौंका सकती है।सबसे पहले सत्ता के दो फॉर्मूले को समझिए, जिसकी चर्चा चल रही है…BJP का CM बना तो JDU के दो डिप्टी CM बनेंगे JDU का सीएम रहेगा और BJP के दो डिप्टी CM रहेंगेअब इसे विस्तार से समझिएसूत्रों की मानें तो BJP खासकर अमित शाह नहीं चाहते थे कि 20 नवंबर 2025 को गांधी मैदान में नीतीश कुमार CM पद की शपथ लें। BJP की तरफ से ऑफर दिया गया था कि नीतीश कुमार अपनी पसंद के किसी नेता का नाम बता दें। वे जिसे अपनी पसंद बता देंगे BJP उसे CM स्वीकार कर लेगी।नीतीश कुमार ने तब ये प्रपोजल स्वीकर नहीं किया। न ही उनके रणनीतिकार तब ये बात माने। ये बोला गया कि मैंडेट नीतीश कुमार के नाम पर मिला है, तो CM भी वही बनेंगे। इसके बाद उन्होंने CM पद की शपथ ली।अब जब उनके स्वास्थ्य को लेकर लगातार सवाल उठने लगे तो JDU के नेताओं की तरफ से मांग की जा रही है कि नीतीश कुमार की पसंद के नेता को ही CM बना दिया जाए।BJP 26 साल पुरानी गलती नहीं दोहराना चाहतीBJP अब किसी भी सूरत में अपनी 26 साल पुरानी गलती नहीं दोहराना चाहती। तब 2000 विधानसभा चुनाव में BJP को 67 सीटें आईं थी और नीतीश कुमार की अगुआई वाली समता पार्टी को 34 सीटें मिली थीं।इसके बाद भी वाजपेयी की अगुआई वाली BJP ने नीतीश कुमार को अपना नेता चुना था और नीतीश कुमार पहली बार CM बने थे। हालांकि, तब विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के दौरान लालू यादव ने नीतीश को पटखनी दे दी थी। और 7 दिन ही सरकार चली थी, लेकिन BJP के लिए नेता नीतीश ही रह गए और BJP उनकी पिछलग्गू बनी रह गई।अब जब BJP बिहार विधानसभा की सबसे बड़ी पार्टी है तो किसी भी सूरत में अपना CM बनाना चाहती है। BJP के राष्ट्रीय स्तर के एक नेता ने भास्कर को बताया कि वे अब किसी भी सूरत में कोई दूसरा नीतीश कुमार नहीं बनाना चाहते हैं।अब BJP के CM के दावेदारों को जानिए1. सम्राट को आगे कर लव-कुश समीकरण साधेगीसम्राट चौधरी कोइरी समाज से आते हैं। नीतीश कुमार कुर्मी हैं। इन दोनों को बिहार की सियासत में लव-कुश कहा जाता है। राज्य में इन दोनों कोइरी और कुर्मी समाज की आबादी तकरीबन 7 फीसदी है। इसमें कोइरी 4.21% कुर्मी 2.87% हैं। इन्हीं के दम पर नीतीश कुमार अपनी राजनीति करते रहे हैं। ऐसे में अगर सम्राट को BJP आगे बढ़ाती है तो नीतीश का ये वोट बैंक उनके पास रह सकता है।BJP बिहार में OBC को साधने के लिए गैर यादव OBC को लगातार साधने का प्रयास कर रही है और इस समीकरण में सम्राट चौधरी बिल्कुल फिट बैठते हैं। कोइरी बिहार में यादव के मुकाबले एक मजबूत पिछड़ी जाति मानी जाती है।सरकार से लेकर संगठन तक का अनुभवसम्राट चौधरी के पास सरकार चलाने से लेकर संगठन चलाने तक का अनुभव है। राबड़ी सरकार में सबसे कम उम्र का मंत्री बनने से लेकर वे मौजूदा समय में दो बार नीतीश सरकार में डिप्टी सीएम रह चुके हैं। इससे पहले वे नीतीश सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं।सरकार के साथ-साथ वे विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा चुके हैं। पार्टी के भीतर वे सचिव, उपाध्यक्ष से लेकर प्रदेश के अध्यक्ष की भूमिका भी निभा चुके हैं। ऐसे में उनके पास हर तरह का अनुभव है।गृहमंत्री सम्राट चौधरी का नीतीश कुमार से संबंध हाल के सालों में बेहतर हुआ है। नीतीश कुमार का भरोसा उन पर बढ़ा है।विपक्षी के खिलाफ आक्रामक शैलीसम्राट चौधरी की सबसे बड़ी ताकत है उनकी आक्रामक शैली। बीजेपी के भीतर ये एकमात्र ऐसे नेता हैं जब नीतीश कुमार के खिलाफ नेता प्रतिपक्ष थे तब उन पर उतना ही तीखा हमला बोला जितना एग्रेसवली ये लालू प्रसाद यादव या तेजस्वी यादव पर अटैक करते हैं।ये बीजेपी की राजनीतिक शैली के लिए फिट हैं। सम्राट के अलावा फिलहाल बिहार में कोई ऐसे नेता नहीं हैं जो लालू और नीतीश दोनों पर आक्रामक रुख रखते हैं।सम्राट के खिलाफ निगेटिव- दूसरी पार्टी से बीजेपी में आएसम्राट चौधरी की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है, उनका दूसरी पार्टी से बीजेपी में आना। सम्राट बीजेपी में आने से पहले राजद और जदयू में थे। ऐसे में पुराने भाजपाई उनका विरोध करते हैं। जब वे पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष थे तब कई दिग्गज नेताओं ने उन्हें आयातित भाजपाई बताया था। हालांकि, असम समेत कई राज्यों में बीजेपी दूसरी पार्टी से शामिल हुए नेताओं को भी शीर्ष पद दे चुकी हैं।2.