Hindi NewsNationalWest Bengal SIR Voter List Case; Mamata Banerjee EC Vs Supreme Court | Calcutta HCसुप्रीम कोर्ट बोला-बंगाल सरकार और EC में भरोसे की कमी: कलकत्ता हाईकोर्ट को निर्देश- SIR के लिए न्यायिक अधिकारी तैनात करेंनई दिल्ली 15 घंटे पहलेकॉपी लिंकसुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच जारी विवाद पर ‘असाधारण’ निर्देश जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल को इस प्रक्रिया में सहयोग के लिए मौजूदा और पूर्व जिला जज को तैनात करने को कहा।कोर्ट ने कहा कि सरकार और आयोग के बीच विश्वास की कमी है। SIR ड्राफ्ट रोल से जुड़े दावे और आपत्तियों का निपटारा और निगरानी हाईकोर्ट की ओर से अपॉइंट अफसर और जज करेंगे।चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों के आदेश अदालत के आदेश माने जाएंगे। कलेक्टर और एसपी को इन आदेशों का पालन कराना होगा।साथ ही चुनाव आयोग को 28 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश करने की परमिशन दी गई है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर बाद में सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी करने की भी छूट दी गई है।सुप्रीम कोर्ट के 4 निर्देशसुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार द्वारा पर्याप्त ग्रेड-ए अधिकारियों को SIR प्रक्रिया के लिए उपलब्ध नहीं कराने पर गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की मदद के लिए माइक्रो-ऑब्जर्वर और राज्य सरकार के अधिकारी तैनात रहेंगे।कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को मुख्य सचिव, डीजीपी और चुनाव आयोग के अधिकारियों समेत सभी संबंधित पक्षों की बैठक बुलाने का निर्देश।डीजीपी को SIR अधिकारियों को दी गई धमकियों पर क्या कदम उठाए गए, इस पर सप्लीमेंट्री एफिडेविट दाखिल करने का आदेश।कोर्ट ने जो मामले अभी लंबित हैं, हाईकोर्ट प्रशासन उन्हें संभालने के लिए फिलहाल कोई अस्थायी व्यवस्था (अंतरिम व्यवस्था) बनाए।कोर्ट रूम LIVEराज्य सरकार: बंगाल सरकार द्वारा पर्याप्त ग्रेड-ए अधिकारियों की तैनाती नहीं की जाने पर वकील कपिल सिब्बल और मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि ग्रुप-B अधिकारी उपलब्ध करा दिए गए हैं। कपिल सिब्बल ने कहा कि एसडीएम राज्य में ग्रुप-A अधिकारी होते हैं। माइक्रो-ऑब्जर्वर को हटाने के लिए एसडीएम स्तर का अधिकारी जरूरी नहीं है।बंगाल सरकार द्वारा पर्याप्त ग्रेड-ए अधिकारियों की तैनाती नहीं की जाने पर वकील कपिल सिब्बल और मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि ग्रुप-B अधिकारी उपलब्ध करा दिए गए हैं। कपिल सिब्बल ने कहा कि एसडीएम राज्य में ग्रुप-A अधिकारी होते हैं। माइक्रो-ऑब्जर्वर को हटाने के लिए एसडीएम स्तर का अधिकारी जरूरी नहीं है। चुनाव आयोग: वकील दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि एसडीएम रैंक के अधिकारी उपलब्ध नहीं कराए गए। एसडीएम ऐसे अधिकारी होते हैं जो अर्ध-न्यायिक (कानूनी प्रभाव वाले) आदेश दे सकते हैं।वकील दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि एसडीएम रैंक के अधिकारी उपलब्ध नहीं कराए गए। एसडीएम ऐसे अधिकारी होते हैं जो अर्ध-न्यायिक (कानूनी प्रभाव वाले) आदेश दे सकते हैं। ममता बनर्जी: वकील श्याम दीवान ने आरोप लगाया कि माइक्रो-ऑब्जर्वर पर रोक लगने के बाद आयोग ने स्पेशल रोल ऑब्जर्वर नाम की नई व्यवस्था शुरू कर दी है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इस आरोप को गलत बताया है।वकील श्याम दीवान ने आरोप लगाया कि माइक्रो-ऑब्जर्वर पर रोक लगने के बाद आयोग ने स्पेशल रोल ऑब्जर्वर नाम की नई व्यवस्था शुरू कर दी है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इस आरोप को गलत बताया है। सुप्रीम कोर्ट: राज्य सरकार से यदि सहयोग नहीं मिला तो वह न्यायिक अधिकारियों को तैनात करेगी या चुनाव आयोग को अन्य राज्यों से अधिकारी तैनात करने की अनुमति देगी।राज्य सरकार से यदि सहयोग नहीं मिला तो वह न्यायिक अधिकारियों को तैनात करेगी या चुनाव आयोग को अन्य राज्यों से अधिकारी तैनात करने की अनुमति देगी। राज्य सरकार : कपिल सिब्बल ने कहा कि यदि 28 फरवरी तक अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की अनुमति दी गई तो कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है।: कपिल सिब्बल ने कहा कि यदि 28 फरवरी तक अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की अनुमति दी गई तो कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है। चुनाव आयोग: सीनियर लीडर डीएस नायडू ने असहयोग और कानून-व्यवस्था के मुद्दे उठाते हुए आरोप लगाया कि शरारती तत्वों ने दस्तावेज फाड़ दिए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।राजनीतिक कार्यकर्ता चुनाव अफसरों के खिलाफ बयान दे रहे हैं, लेकिन किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई।TMC सुप्रीम कोर्ट के फैसले की तारीफ कीTMC ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लोगों की बड़ी जीत बताया। TMC का कहना है कि इससे साबित होता है कि रिवीजन प्रक्रिया में गड़बड़ियां थीं और असली वोटरों के नाम हटाए जा रहे थे। वहीं भाजपा ने कन्फ्यूजन के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया।केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि राज्य प्रशासन प्रक्रिया में रुकावट डाल रहा है, जबकि चुनाव आयोग निष्पक्ष संशोधन चाहता है। BJP का दावा है कि SIR नकली वोटरों को हटाने के लिए जरूरी है, जबकि TMC इसे असली वोटरों को टारगेट करने की कोशिश बता रही है।साउथ 24 परगना में CEC के खिलाफ 7 शिकायत दर्जबंगाल के साउथ 24 परगना जिले में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान लोगों को परेशान करने के आरोप में चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर के खिलाफ जिबनताला पुलिस स्टेशन में सात शिकायतें दर्ज हुईं। ये शिकायतें TMC विधायक सौकत मोल्ला के साथ कुछ लोगों ने कीं।पुलिस अधिकारी ने कहा कि शिकायतों की जांच की जाएगी। विधायक का कहना है कि उनके क्षेत्र में बड़ी संख्या में नाम वोटर लिस्ट से हटाने की सिफारिश की गई है।विधायक ने आरोप लगाया कि करीब 33 हजार नाम हटाने की कोशिश की गई, जिनमें ज्यादातर मुस्लिम समुदाय के हैं, और इसे असली वोटरों को रोकने की साजिश बताया। उन्होंने ज्ञानेश कुमार पर भी गं