Hindi NewsNationalWest Bengal SIR Voter List Case; Mamata Banerjee EC Vs Supreme Court | Calcutta HCसुप्रीम कोर्ट बोला-बंगाल सरकार और EC में भरोसे की कमी: कलकत्ता हाईकोर्ट को निर्देश- SIR के लिए न्यायिक अधिकारी तैनात करेंनई दिल्ली 15 घंटे पहलेकॉपी लिंकसुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच जारी विवाद पर ‘असाधारण’ निर्देश जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल को इस प्रक्रिया में सहयोग के लिए मौजूदा और पूर्व जिला जज को तैनात करने को कहा।कोर्ट ने कहा कि सरकार और आयोग के बीच विश्वास की कमी है। SIR ड्राफ्ट रोल से जुड़े दावे और आपत्तियों का निपटारा और निगरानी हाईकोर्ट की ओर से अपॉइंट अफसर और जज करेंगे।चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों के आदेश अदालत के आदेश माने जाएंगे। कलेक्टर और एसपी को इन आदेशों का पालन कराना होगा।साथ ही चुनाव आयोग को 28 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश करने की परमिशन दी गई है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर बाद में सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी करने की भी छूट दी गई है।सुप्रीम कोर्ट के 4 निर्देशसुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार द्वारा पर्याप्त ग्रेड-ए अधिकारियों को SIR प्रक्रिया के लिए उपलब्ध नहीं कराने पर गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की मदद के लिए माइक्रो-ऑब्जर्वर और राज्य सरकार के अधिकारी तैनात रहेंगे।कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को मुख्य सचिव, डीजीपी और चुनाव आयोग के अधिकारियों समेत सभी संबंधित पक्षों की बैठक बुलाने का निर्देश।डीजीपी को SIR अधिकारियों को दी गई धमकियों पर क्या कदम उठाए गए, इस पर सप्लीमेंट्री एफिडेविट दाखिल करने का आदेश।कोर्ट ने जो मामले अभी लंबित हैं, हाईकोर्ट प्रशासन उन्हें संभालने के लिए फिलहाल कोई अस्थायी व्यवस्था (अंतरिम व्यवस्था) बनाए।कोर्ट रूम LIVEराज्य सरकार: बंगाल सरकार द्वारा पर्याप्त ग्रेड-ए अधिकारियों की तैनाती नहीं की जाने पर वकील कपिल सिब्बल और मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि ग्रुप-B अधिकारी उपलब्ध करा दिए गए हैं। कपिल सिब्बल ने कहा कि एसडीएम राज्य में ग्रुप-A अधिकारी होते हैं। माइक्रो-ऑब्जर्वर को हटाने के लिए एसडीएम स्तर का अधिकारी जरूरी नहीं है।बंगाल सरकार द्वारा पर्याप्त ग्रेड-ए अधिकारियों की तैनाती नहीं की जाने पर वकील कपिल सिब्बल और मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि ग्रुप-B अधिकारी उपलब्ध करा दिए गए हैं। कपिल सिब्बल ने कहा कि एसडीएम राज्य में ग्रुप-A अधिकारी होते हैं। माइक्रो-ऑब्जर्वर को हटाने के लिए एसडीएम स्तर का अधिकारी जरूरी नहीं है। चुनाव आयोग: वकील दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि एसडीएम रैंक के अधिकारी उपलब्ध नहीं कराए गए। एसडीएम ऐसे अधिकारी होते हैं जो अर्ध-न्यायिक (कानूनी प्रभाव वाले) आदेश दे सकते हैं।वकील दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि एसडीएम रैंक के अधिकारी उपलब्ध नहीं कराए गए। एसडीएम ऐसे अधिकारी होते हैं जो अर्ध-न्यायिक (कानूनी प्रभाव वाले) आदेश दे सकते हैं। ममता बनर्जी: वकील श्याम दीवान ने आरोप लगाया कि माइक्रो-ऑब्जर्वर पर रोक लगने के बाद आयोग ने स्पेशल रोल ऑब्जर्वर नाम की नई व्यवस्था शुरू कर दी है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इस आरोप को गलत बताया है।वकील श्याम दीवान ने आरोप लगाया कि माइक्रो-ऑब्जर्वर पर रोक लगने के बाद आयोग ने स्पेशल रोल ऑब्जर्वर नाम की नई व्यवस्था शुरू कर दी है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इस आरोप को गलत बताया है। सुप्रीम कोर्ट: राज्य सरकार से यदि सहयोग नहीं मिला तो वह न्यायिक अधिकारियों को तैनात करेगी या चुनाव आयोग को अन्य राज्यों से अधिकारी तैनात करने की अनुमति देगी।राज्य सरकार से यदि सहयोग नहीं मिला तो वह न्यायिक अधिकारियों को तैनात करेगी या चुनाव आयोग को अन्य राज्यों से अधिकारी तैनात करने की अनुमति देगी। राज्य सरकार : कपिल सिब्बल ने कहा कि यदि 28 फरवरी तक अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की अनुमति दी गई तो कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है।: कपिल सिब्बल ने कहा कि यदि 28 फरवरी तक अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की अनुमति दी गई तो कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है। चुनाव आयोग: सीनियर लीडर डीएस नायडू ने असहयोग और कानून-व्यवस्था के मुद्दे उठाते हुए आरोप लगाया कि शरारती तत्वों ने दस्तावेज फाड़ दिए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।राजनीतिक कार्यकर्ता चुनाव अफसरों के खिलाफ बयान दे रहे हैं, लेकिन किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई।TMC सुप्रीम कोर्ट के फैसले की तारीफ कीTMC ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लोगों की बड़ी जीत बताया। TMC का कहना है कि इससे साबित होता है कि रिवीजन प्रक्रिया में गड़बड़ियां थीं और असली वोटरों के नाम हटाए जा रहे थे। वहीं भाजपा ने कन्फ्यूजन के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया।केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि राज्य प्रशासन प्रक्रिया में रुकावट डाल रहा है, जबकि चुनाव आयोग निष्पक्ष संशोधन चाहता है। BJP का दावा है कि SIR नकली वोटरों को हटाने के लिए जरूरी है, जबकि TMC इसे असली वोटरों को टारगेट करने की कोशिश बता रही है।साउथ 24 परगना में CEC के खिलाफ 7 शिकायत दर्जबंगाल के साउथ 24 परगना जिले में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान लोगों को परेशान करने के आरोप में चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर के खिलाफ जिबनताला पुलिस स्टेशन में सात शिकायतें दर्ज हुईं। ये शिकायतें TMC विधायक सौकत मोल्ला के साथ कुछ लोगों ने कीं।पुलिस अधिकारी ने कहा कि शिकायतों की जांच की जाएगी। विधायक का कहना है कि उनके क्षेत्र में बड़ी संख्या में नाम वोटर लिस्ट से हटाने की सिफारिश की गई है।विधायक ने आरोप लगाया कि करीब 33 हजार नाम हटाने की कोशिश की गई, जिनमें ज्यादातर मुस्लिम समुदाय के हैं, और इसे असली वोटरों को रोकने की साजिश बताया। उन्होंने ज्ञानेश कुमार पर भी गं

February 20, 2026 19:18 UTC

President Donald Trump vowed on Friday (February 20, 2026) to impose a 10% tariff on all imports into the United States after the Supreme Court handed him a stinging rebuke by striking down his signature economic policy. “I’m ashamed of certain members of the court, absolutely ashamed, for not having the courage to do what’s right for our country,” Mr. Trump told reporters. Mr. Trump said he would use a separate authority to impose a uniform tariff of 10% — after he spent the past year imposing various rates spontaneously to cajole and punish other countries. Mr. Trump heaped praise on Brett Kavanaugh, the only justice he nominated who voted with him. Constrained ambitionThe European Union said it was studying the court ruling and will remain in close contact with the Trump administration.

February 20, 2026 19:09 UTC

जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। Rapid Rail दिल्ली से मेरठ (मोदीपुरम) की 82 किलोमीटर की दूरी अब महज 55 मिनट में रैपिड रेल (नमो भारत, Namo Bharat Train) के जरिए पूरी कर सकेंगे।नमो भारत ट्रेन का दिल्ली के सराय काले खां तक का हिस्सा बनकर तैयार हो चुका है। अभी तक रैपिड रेल दिल्ली के न्यू अशोक नगर से मेरठ तक चल रही है।सराय काले खां स्टेशन दिल्ली। जागरणवहीं, शुक्रवार को रैपिड रेल ट्रायल रन के तहत दोपहर 12 बजे सराय काले खां से मेरठ के बेगमपुल के लिए रवाना हुई।बताया कि बिना रुके यह सफर 39 मिनट में तय हुआ। इस बीच अधिकतम रफ्तार 150 किमी प्रति घंटे भी दर्ज की।दिल्ली में सराय काले खां स्टेशन सबसे बड़े मल्टी मॉडल हब के रूप में तैयार किया गया है। यहां नमो भारत ट्रेन के प्रस्तावित दिल्ली-करनाल व दिल्ली-अलवर रूट भी मिलेंगे। इसे रेलवे और डीएमआरसी से भी जोड़ा गया है।नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एनसीआरटीसी) के द्वारा संचालित नमो भारत (रैपिड रेल) का दिल्ली तक का खंड बनकर तैयार हो गया है, जिसका उद्घाटन 22 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे।बेगमपुल नमो भारत स्टेशन। जागरणइसके बाद दिल्ली के सराय काले खां से उत्तर प्रदेश के मेरठ तक लोग इस नमो भारत ट्रेन के जरिए अपनी यात्रा कर सकेंगे।सराय काले खां स्टेशन की प्रमुख विशेषताएंसराय काले खां स्टेशन सबसे बड़े मल्टी मॉडल हब के रूप में तैयार किया गया है। यहां दिल्ली-मेरठ के साथ ही नमो भारत ट्रेन के प्रस्तावित दिल्ली-करनाल व दिल्ली-अलवर रूट भी मिलेंगे। इसे रेलवे और डीएमआरसी से भी जोड़ा गया है।सराय काले खां स्टेशन में पांच प्रवेश-निकास द्वार, 14 लिफ्ट, 18 एस्केलेटर और कई सीढ़ियां हैं। स्टेशन में सभी लिफ्ट और एस्केलेटर, प्लेटफार्म स्क्रीन डोर्स (पीएसडी) लगाए जा चुके हैं।यहां हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन, मेट्रो की पिंक लाइन, वीर हकीकत राय आईएसबीटी और रिंग रोड को भी जोड़ा गया है।स्टेशन को हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से जोड़ने के लिए 280 मीटर लंबा फुटओवर ब्रिज बनाया गया है। इसमें छह ट्रैवलेटर लगे हैं।एक नजर में दिल्ली - मेरठ कॉरिडोर

February 20, 2026 19:00 UTC

By curbing the executive’s ability to impose wide-ranging tariffs without congressional approval, the decision reduces the likelihood of sudden policy shocks that can roil markets. Analysts said the judgment brings greater predictability to US trade policy, an important consideration for investors already navigating uncertainty around interest rates, growth and geopolitics. The dollar was mixed, as traders weighed improved trade prospects against shifting expectations for US economic policy. Investors expect the decision to reduce the risk of retaliatory tariffs and trade disputes that had previously clouded the outlook for global growth. Wall Street’s rise underscored how closely markets had tied Trump’s tariff regime to economic risk.

February 20, 2026 18:53 UTC

The essence, its worldviewLong dismissed as preoccupied, politically disengaged, and lost in the virtual world, Gen Z defied expectations by expressing anguish in such an ‘organised way’. A comparison of protestsThe difference becomes clear when one compares the farmers’ movement (2020-24) with the Gen Z protests. In comparison, Gen Z protests fizzle out and disappear without a trace but nevertheless leave a great impact behind. The precarity of Gen Z gets reflected in its fragmented and fleeting involvement with democratic events and issues. Gen Z will continue to disappoint us with responses we expect, yet surprise us with responses we have not yet thought about.

February 20, 2026 18:51 UTC





डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को मध्यावधि चुनावों से पहले सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में शुक्रवार को ट्रंप के बड़े पैमाने पर लगाए टैरिफ को खारिज कर दिया, जिन्हें उन्होंने राष्ट्रीय आपातकाल में इस्तेमाल के लिए बने कानून के तहत लागू किया था। शीर्ष अदालत ने इस फैसले में इस संबंध में राष्ट्रपति के पास अधिकार होने के दावे को खारिज कर दिया है। अब यह फैसला भारत के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।अचानक टैरिफ झटके का खतरा कम अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने राष्ट्रपति को IEEPA कानून के तहत आपातकालीन शक्तियों का दुरुपयोग करके मनमाने टैरिफ लगाने पर रोक लगा दी है। इससे भारतीय निर्यातकों को राहत मिली है। इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटो कंपोनेंट्स, केमिकल्स, टेक्सटाइल और जेम्स-ज्वेलरी जैसे सेक्टर अचानक लगने वाले डिस्क्रिशनरी टैरिफ से सबसे ज्यादा प्रभावित होते थे। अब अस्थिरता का जोखिम काफी हद तक घट जाएगा।भारत के लिए बेहतर मौका इस फैसले ने अमेरिकी टैरिफ नीति को कांग्रेस की निगरानी वाले कानूनी ढांचे में लौटा दिया है। अब औपचारिक जांच, प्रक्रियागत सुरक्षा और समयबद्ध चर्चा अनिवार्य हो गई है। भारत के लिए इसका मतलब है ज्यादा संरचित वार्ता, साफ समयसीमा और उत्पाद-विशेष राहत की मांग करने का बेहतर मौका। व्हाइट हाउस की एकतरफा घोषणाओं के बजाय अब भारत सक्रिय बातचीत कर सकेगा.

February 20, 2026 18:47 UTC

'India's Tech Talent Deep Enough To Rival Challengers': Behind India's 'Strategic' Pax Silica EntryIn December 2025, a bunch of countries with the U.S. at the helm formed an alliance to ensure that we never see a 2020-like tech disruption again. Now, especially at a time when AI is essentially going to determine which country marches forth in the next few years, depending on just one nation for securing critical minerals is dicey. That's where Pax Silica comes in - and India's entry into this sphere is not just strategic, it's essential.

February 20, 2026 18:42 UTC

मोहम्मद साकिब, नई दिल्ली। भारत मंडपम में शुक्रवार को यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया विरोध-प्रदर्शन रणनीति के तहत अंजाम दिया गया था। जैसे-जैसे पुलिस मामले में जांच कर रही है, इसके पीछे की सुनियोजित साजिश की परतें एक-एक कर सामने आ रही हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपितों की योजना एआई समिट में काले रंग के छातों पर प्रिंटेड स्टिकर चिपकाकर अंदर ही अंदर विरोध-प्रदर्शन करने की थी।अचानक बदल दी रणनीति जांच में पता चला है कि इसके लिए विशेष रूप से स्टिकर तैयार कराए गए थे, लेकिन भारत मंडपम के हाई-सिक्योरिटी जोन में कड़ी जांच और तलाशी को देखते हुए पकड़े जाने की आशंका के चलते आरोपितों ने अपनी रणनीति बदलते हुए टी-शर्ट पर स्लोगन छपवाकर प्रदर्शन करने का फैसला लिया।अलग-अलग जगहों से कराई प्रिंटिंग जांच में सामने आया है कि स्टिकर और टी-शर्ट अलग-अलग स्थानों से प्रिंट कराई गई थीं। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह सामग्री कहां-कहां तैयार कराई गई और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका रही।जांच एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम को बड़े षड्यंत्र के एंगल से भी खंगाल रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि इतने हाई-सिक्योरिटी जोन में बड़ी संख्या में लोगों का एक साथ पहुंचना और सुनियोजित तरीके से प्रदर्शन करना किसी संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करता है।नेटवर्क की हर कड़ी की तलाश पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इसके पीछे किसी बड़े संगठन, राजनीतिक रणनीति या बाहरी प्रभाव की भूमिका तो नहीं है। इसके तहत आरोपितों के मोबाइल फोन, इंटरनेट मीडिया अकाउंट और काल डिटेल रिकार्ड की तकनीकी जांच की जा रही है। साेशल मीडिया प्लेटफार्म पर साझा किए गए वीडियो, तस्वीरें और संदेशों की फाेरेंसिक जांच कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है।भारत मंडपम में बढ़ाई सुरक्षा भारत मंडपम परिसर में घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सभी प्रवेश द्वारों पर अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती के साथ बहुस्तरीय जांच प्रक्रिया लागू की गई है। अब सघन तलाशी और पहचान सत्यापन के बिना प्रवेश नहीं मिलेगा। आयोजकों ने भी सुरक्षा प्रोटोकाल की समीक्षा शुरू कर दी है।

February 20, 2026 18:37 UTC

ADVERTISEMENT"That's going to be a wild one," Trump told foreign leaders on Thursday about the China trip. While the October meeting largely sidestepped the sensitive issue of Taiwan, in February Xi raised US arms sales to the island. The United States has formal diplomatic ties with China, but maintains unofficial ties with Taiwan and is the island's most important arms supplier. According to Trump, Xi also said during the February call that he would consider further increasing soybean purchases. Soybeans are key because struggling US farmers are a major domestic political constituency for Trump, and China is the top consumer.

February 20, 2026 18:36 UTC

Hindi NewsBusinessIndia US Trade Deal Final By Feb End | Piyush Goyalभारत-अमेरिका ट्रेड डील फरवरी के अंत तक फाइनल होगी: मार्च में हस्ताक्षर होंगे; 1 अप्रैल से लागू होने की उम्मीदनई दिल्ली 5 घंटे पहलेकॉपी लिंकवाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को बताया कि अमेरिका के साथ 'अंतरिम व्यापार समझौता' फरवरी के अंत तक फाइनल हो जाएगा। मार्च में इस पर हस्ताक्षर होंगे, वहीं अप्रैल से ये समझौता पूरी तरह लागू हो जाएगा।इसके साथ ही भारत आने वाले कुछ महीनों में दुनिया के बड़े देशों साथ व्यापारिक समझौतों पर अंतिम मुहर लगाएगा। अप्रैल में ब्रिटेन और ओमान के साथ भी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट शुरू होने की उम्मीद है।23 फरवरी को फाइनल होगा कानूनी ड्राफ्ट23 फरवरी से भारत और अमेरिका के अधिकारी अमेरिका में तीन दिनों की अहम बैठक करेंगे। इस बैठक का मकसद 7 फरवरी को जारी 'जॉइंट स्टेटमेंट' के आधार पर कानूनी ड्राफ्ट तैयार करना है।वाणिज्य मंत्रालय के चीफ नेगोशिएटर दर्पण जैन भारतीय डेलिगेशन का नेतृत्व करेंगे।उम्मीद है कि टैक्स में 25% से 18% की कमी का आधिकारिक आदेश इसी हफ्ते या अगले हफ्ते तक आ जाएगा। इससे भारत के कपड़ा, चमड़ा और जेम्स-ज्वैलरी जैसे सेक्टर को सीधा फायदा होगा।7 फरवरी को ट्रेड डील का ऐलान हुआ थाकॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने 7 फरवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिका के साथ ट्रेड डील की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि भारतीय कृषि उत्पाद अमेरिका में जीरो टैरिफ पर निर्यात किए जाएंगे, जबकि अमेरिका के कृषि उत्पादों को भारत में कोई टैरिफ छूट नहीं दी गई है।पीयूष गोयल ने साफ किया कि इस समझौते में जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फूड को भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली है। उन्होंने कहा- यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 27.18 लाख करोड़ रुपए) के बाजार को खोलेगा।इसके अलावा भारत ने अगले 5 साल में अमेरिका से 50 हजार करोड़ डॉलर (45 लाख 30 हजार करोड़ रुपए) के उत्पाद खरीदने पर सहमति जताई है। भारत और अमेरिका ने शुक्रवार को अंतरिम व्यापार समझौते (ITA ) का फ्रेमवर्क जारी किया है।इसके तहत भारतीय सामान पर अमेरिका का टैक्स 50% घटाकर 18% कर दिया गया है। रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर लगाया गया 25% अतिरिक्त टैक्स भी हटा लिया गया है।नॉन-टैरिफ बाधाओं को दूर करेंगे दोनों देशपीयूष गोयल ने बताया कि दोनों देशों ने फैसला किया है कि वे इसके कुछ नियम तय करेंगे, ताकि इस समझौते का लाभ मुख्य रूप से अमेरिका और भारत को ही मिले, न कि किसी तीसरे देश को।भारत और अमेरिका का इस व्यापार समझौते में नॉन-टैरिफ बैरियर्स को दूर करने पर खास फोकस है। ये बाधाएं टैरिफ नहीं होतीं, लेकिन व्यापार को मुश्किल बनाती हैं। अमेरिकी मेडिकल डिवाइसेस कंपनियों को भारत में कीमत तय करने के नियम, रजिस्ट्रेशन में देरी जैसी रुकावटों का सामना करना पड़ा रहा था।अप्रैल में ब्रिटेन और ओमान के साथ हुई डील लागू होगीभारत-ब्रिटेन पिछले साल जुलाई में हुए FTA के बाद अब इसे अप्रैल से लागू किया जा सकता है। इससे भारत के 99% उत्पादों को ब्रिटेन में 'जीरो ड्यूटी' पर एंट्री मिलेगी। बदले में भारत ब्रिटेन से आने वाली कारों और स्कॉच व्हिस्की पर टैक्स कम करेगा।ओमान के साथ भी अप्रैल में डील लागू होने की उम्मीद है, जिससे खाड़ी देशों में भारतीय सामान की पहुंच आसान होगी। ओमान ने भारत के 98% से ज्यादा उत्पादों पर जीरो ड्यूटी की पेशकश की है।.

February 20, 2026 18:36 UTC

Andrew Mountbatten-Windsor could lose royal succession rights, says UK official Any changes to the line of succession would require consultation and agreement with other countries where King Charles, Andrew's brother, is head of stateReutersBritain's government will consider new legislation to remove Andrew Mountbatten-Windsor from the line of royal succession once the ongoing police investigation into his ties with Jeffrey Epstein is over, a UK official said on Friday. Any changes to the line of succession would require consultation and agreement with other countries where King Charles, Andrew's brother, is head of state, the official - who asked not to be identified - said.

February 20, 2026 18:24 UTC

लेखक के बारे में अमित शुक्‍ला अमित शुक्‍ला, नवभारत टाइम्स डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं। वह 18 साल से भी ज्‍यादा समय से पत्रकारिता से जुड़े हैं। इस दौरान उन्‍होंने बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, अंतरराष्‍ट्रीय व्‍यापार, शेयर मार्केट, राजनीति, देश-विदेश, प्रॉपर्टी, करियर जैसे तमाम विषयों को कवर किया है। पत्रकारिता और जनसंचार में PhD करने वाले अमित शुक्ला 7 साल से भी ज्‍यादा समय से टाइम्‍स इंटरनेट लिमिटेड के साथ जुड़े हैं। टाइम्‍स इंटरनेट में रहते हुए नवभारतटाइम्‍स डॉट कॉम से पहले इकनॉमिकटाइम्‍स डॉट कॉम में सेवाएं दीं। उन्‍होंने टीवी टुडे नेटवर्क, दैनिक जागरण, डीएलए जैसे मीडिया संस्‍थानों के अलावा शैक्षणिक संस्थानों के साथ भी काम किया है। इनमें शिमला यूनिवर्सिटी- एजीयू, टेक वन स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय (नोएडा) शामिल हैं। लिंग्विस्‍ट के तौर पर भी पहचान बनाई है। मार्वल कॉमिक्स ग्रुप, सौम्या ट्रांसलेटर्स, ब्रह्मम नेट सॉल्यूशन, सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी और लिंगुअल कंसल्टेंसी सर्विसेज समेत कई अन्य भाषा समाधान प्रदान करने वाले संगठनों के साथ फ्रीलांस काम किया।... और पढ़ें

February 20, 2026 18:19 UTC

लेखक के बारे में रिजवान रिजवान, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में चीफ सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पत्रकारिता में उनका करीब 10 वर्षों का अनुभव है। वह इंटरेशनल अफेयर्स (वर्ल्ड सेक्शन) कवर कर रहे हैं। अमर उजाला के साथ डिजिटल पारी की शुरुआत की और फिर वन इंडिया हिंदी, राजस्थान पत्रिका से होते हुए नवभारत टाइम्स में है। उन्‍होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय और भारतीय जनसंचार संस्थान से पढ़ाई की है।... और पढ़ें

February 20, 2026 18:11 UTC

नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को उनके ही देश में बड़ा झटका लगा है। उन्हें अपने ही बिछाए जाल में हार का सामना करना पड़ा। 2025 में सत्ता में वापसी करने के बाद टैरिफ-टैरिफ खेलने वाले ट्रंप के टैरिफ को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रद्द (US Supreme Court strikes down Trump Tariffs) कर दिया है। यानी जिस देश पर ट्रंप के पहले जितना टैरिफ था उतना ही टैरिफ हो सकता है। यानी India-US के बीच जो डील हुई है वह फिर से हो सकती है। क्योंकि ट्रंप के आने से पहले भारत पर 2 से 3 फीसदी का टैरिफ लगता था। लेकिन इस डील में यह 18 फीसदी तक है। इसलिए भारत की अमेरिका से फिर से ट्रेड डील हो सकती है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने 2025 में लागू किए गए टैरिफ के लिए कांग्रेस (अमेरिकी संसद) से नहीं ली थी। टैरिफ को लागू करने के लिए उन्होंने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट का इस्तेमाल किया था। लेकिन अब उनका टैरिफ रद्द हो चुका है।क्या फिर से होगी India-US Trade Deal? डोनल्ड ट्रंप को उनके ही देश में झटका लगने के बाद भारत में इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि क्या India-US Trade Deal फिर से होगी? इसे लेकर जागरण बिजनेस को पिरामल एंटरप्राइजेज लिमिटेड के चीफ इकोनॉमिस्ट देबोपम चौधरी ने कहा कि देखिए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसले को अगर पढ़े तो उसमें साफ कहा गया है हि कि ट्रंप द्वारा लगाया गया टैरिफ रद्द किया जाता है।इसलिए अब भारत समेत उन सभी देशों पर उतना ही टैरिफ लागू हो जो ट्रंप के आने से पहले थे। ऐसे में भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील फिर से हो सकती है। यह निगोशिएबल है। क्योंकि अभी ट्रेड डील पर साइन नहीं हुआ है। इससे पहले भारत पर 3 से 4 फीसदी का टैरिफ लगता था। अब वही लगेगा।देबोपम चौधरी, पिरामल एंटरप्राइजेज लिमिटेड के मुख्य अर्थशास्त्री ने जगरण बिजनेस से बातचीत में कहा: "अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ध्यान से देखें तो स्पष्ट है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ को रद्द कर दिया गया है। नतीजतन, भारत सहित सभी प्रभावित देशों पर अब वही पुराना टैरिफ स्तर लागू होगा, जो ट्रंप के कार्यकाल से पहले था। इससे भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की संभावना फिर से मजबूत हो सकती है। बातचीत के जरिए इसे तय किया जा सकता है, क्योंकि अभी कोई अंतिम डील साइन नहीं हुई है। पहले भारत पर महज 3-4 प्रतिशत टैरिफ था, और अब भी वही स्थिति बहाल हो जाएगी।" ट्रंप के टैरिफ से पहले भारत कितना देता था टैरिफ 2025 में टैरिफ में बड़ी बढ़ोतरी शुरू होने से पहले, भारत ज्यादातर चीजों पर US के मुकाबले कम टैरिफ दे रहा था, जो आम तौर पर 3-4% की रेंज में होता था। ट्रंप के अलग-अलग इंडियन एक्सपोर्ट पर 25% से 50% के प्यूनिटिव टैरिफ लागू होने के बाद, जो अगस्त 2025 में लागू हुए, फरवरी 2026 में एक नई डील ने इन्हें घटाकर 18% कर दिया। हालांकि, अब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से यह फिर से 3 से 4 फीसदी हो जाएगा। 6-3 के फैसले से रद्द हुआ ट्रंप का टैरिफ कंजर्वेटिव चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स के 6-3 के फ़ैसले में जजों ने निचली अदालत के उस फैसले को सही ठहराया जिसमें कहा गया था कि ट्रंप का 1977 के इस कानून का इस्तेमाल उनके अधिकार से ज़्यादा था। जजों ने फैसला सुनाया कि जिस कानून पर बात हो रही है - इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट, या IEEPA - वह ट्रंप को टैरिफ़ लगाने की वह पावर नहीं देता जिसका उन्होंने दावा किया था।सुप्रीम कोर्ट के ज्यादातर सदस्यों ने यह भी कहा कि इस तरह का मतलब कांग्रेस की शक्तियों में दखल देगा और "मेजर क्वेश्चन्स" डॉक्ट्रिन नाम के कानूनी सिद्धांत का उल्लंघन करेगा। ट्रंप टैरिफ का हुआ था खूब विरोध प्रेसिडेंट डोनल्ड ट्रंप ने दावा किया है था टैरिफ से US का सरकारी खजाना भरेगा, देश के इंडस्ट्रियल इलाकों में नई जान आएगी और दुनिया की इकॉनमी US के लिए ज्यादा "फेयर" होगी। लेकिन इकोनॉमिस्ट ने बार-बार चेतावनी दी है कि सालों से बढ़ी हुई महंगाई के बाद अमेरिकियों के लिए कीमतें और बढ़ने का खतरा है।

February 20, 2026 17:58 UTC

नई दिल्ली| अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बड़े पैमाने पर लगाए गए टैरिफ को गैरकानूनी (Supreme Court strikes down Trump tariffs) करार दिया है।6-3 के बहुमत से फैसला आया कि ट्रंप ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का दुरुपयोग किया। ये टैरिफ कई देशों पर 10% से 50% तक लगाए गए थे, जिसमें भारत पर भी भारी शुल्क थे।अगर ये टैरिफ पूरी तरह हटते हैं या काफी कम होते हैं, तो भारत को बड़ा फायदा (US tariffs on India lifted) होगा। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है।हाई टैरिफ से भारतीय सामान महंगे हो जाते थे, जिससे मांग घटती थी। अब भारतीय उत्पाद अमेरिका में सस्ते होंगे, जिससे निर्यात बढ़ सकता है। इससे रोजगार बढ़ेगा, खासकर लेबर-इंटेंसिव सेक्टर में।यह भी पढ़ें- ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका, अमेरिकी राष्ट्रपति का टैरिफ गैरकानूनी; भारत पर क्या पड़ेगा सीधा असर? भारत को होंगे क्या-क्या फायदे? निर्यात में तेजी आएगी, खासकर टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वैलरी, लेदर और केमिकल्स में।कंपनियां अमेरिका में ज्यादा निवेश कर सकती हैं।रुपए पर दबाव कम होगा और अर्थव्यवस्था मजबूत बनेगी।पहले जमा टैरिफ की रिफंड भी संभव है, जिससे कंपनियों को राहत मिलेगी।सस्ते होने वाला प्रमुख सामान की लिस्टटेक्सटाइल और कपड़े (RMG, कॉटन गारमेंट्स)जेम्स एंड ज्वेलरी (हीरे, सोना आभूषण)लेदर और फुटवियरकेमिकल्स (ऑर्गेनिक केमिकल्स)ऑटोमोबाइल पार्ट्सहोम डेकोर और हैंडीक्राफ्ट्समरीन प्रोडक्ट्स (झींगा, सीफूड)फर्नीचर और स्पोर्टिंग गुड्सये सेक्टर पहले 25-50% टैरिफ से बुरी तरह प्रभावित थे। अब सस्ते होने से अमेरिकी खरीदार ज्यादा भारतीय सामान लेंगे। हालांकि, कुछ सेक्टर जैसे फार्मास्यूटिकल्स पहले से छूट थे, लेकिन कुल मिलाकर भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

February 20, 2026 17:55 UTC