डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका ईरान में मजबूत ठिकानों पर अपना सबसे नया और दूसरा सबसे शक्तिशाली बंकर-बस्टिंग GBU-72 बम गिरा रहा है। यह पहली बार है जब इस हथियार का इस्तेमाल किसी युद्ध में किया गया है। बम की आधिकारिक तौर पर पहचान किए बिना यूएस सेंट्रल कमांड ने 17 मार्च को एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि सैन्य बलों ने ईरान की मजबूत मिसाइल साइटों पर 5,000 पाउंड के कई डीप पेनेट्रेटर गोला-बारूद का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया।क्या है जीबीयू-72 बम? रिटायर्ड एयर फोर्स लेफ्टिनेंट जनरल मार्क वेदरिंगटन ने बाद में सीएनएन को बताया कि ये गोला-बारूद गाइडेड बॉम्ब यूनिट-72 एडवांस्ड 5K पेनिट्रेटर्स थे। इन बमों को होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरानी तटरेखा पर स्थित ठिकानों पर गिराया गया था।जीबीयू-72 बम का एक पुराना संस्करण है। इसे जमीन के नीचे गहराई में दबे और मजबूती से बने लक्ष्यों को भेदने के लिए डिजाइन किया गया है। इनमें मिसाइल साइट्स, कमांड सेंटरों, परमाणु सुविधाओं और अन्य ठिकाने शामिल हैं। साथ ही यह जमीन के ऊपर होने वाले नुकसान को भी कम से कम रखता है।कैसे करता है काम? ये बम बिना इंजन के ही बहुत तेज गति पकड़ लेते हैं, क्योंकि उन्हें ऊंचाई से गिराया जाता है।जब एक के बाद एक कई बम गिराए जाते हैं तो एक 'छेद बनाने वाला प्रभाव' उत्पन्न होता है, जिससे हर अगला बम और भी गहराई तक प्रवेश कर पाता है।बमों की गति, वजन और सख्त खोल उन्हें जमीन के काफी नीचे तक पहुंचा देते हैं।जमीन के नीचे दबे लक्ष्यों के भीतर, बम 'हार्ड टारगेट स्मार्ट फ्यूज' का इस्तेमाल करके एक निश्चित समय पर फट सकता है।GBU-72 सतह से 200 फीट नीचे तक के भूमिगत लक्ष्यों को भेद सकता है। 'बंकर बस्टर्स' को कठोर स्टील के खोल के साथ डिजाइन किया जाता है, जिससे वे मिट्टी और कंक्रीट की परतों को भेदकर अंदर घुस जाते हैं और केवल एक निश्चित गहराई तक पहुँचने के बाद ही फटते हैं।
Source: Dainik Jagran March 22, 2026 06:48 UTC