ये अफसोसजनक ही नहीं व्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा है। जिन ट्रामा सेंटरों के भरोसे मरीजों की जिंदगी दांव पर लगी है उनमें से कोई सेंटर पंजीकृत नहीं है। न मानक ही पूरे कर रहा है। फिर ये ट्रामा सेंटर कैसे संचालित हैं? अलीगढ़, जेएनएन। ये अफसोसजनक ही नहीं, व्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा है। जिन ट्रामा सेंटरों के भरोसे मरीजों की जिंदगी दांव पर लगी है, उनमें से कोई सेंटर पंजीकृत नहीं है। न मानक ही पूरे कर रहा है। फिर ये ट्रामा सेंटर कैसे संचालित हैं? स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर इतनी फुर्सत नहीं कि इन सेंटरों में झांक ही आएं। हैरत की बात हैं? कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अब तक किसी ट्रामा सेंटर की जांच-पड़ताल नहीं की। अगर की हाेती तो ये सेंटर कुकरमुत्तों की तरह खड़े न हो रहे होते। जनपद में ऐसे तकरीबन 100 हास्पिटल हैं, जिनमें ट्रामा सेंटर चल रहे हैं। कई सेंटर तो माफिया चला रहे हैं। ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। यहां न योग्य स्टाफ है, न ही जरूरी उपकरण। मरीजों को यहां एंबुलेंस से ढोकर लाया जाता है। बचेंगे या नहीं, कोई गारंटी नहीं होती। जागरण की टीम ने छानबीन की तो पता चला कि हास्पिटल, नर्सिंग होम के पंजीकरण पर ही ये ट्रामा सेंटर संचालित हैं। ट्रामा सेंटर का अपना कोई पंजीकरण नहीं है। जाहिर हैं? कि विभागीय सांठगांठ के बिना ये संभव नहीं हो सकता। अब जरूरी हो गया हैं?
Source: Dainik Jagran July 23, 2021 02:15 UTC