ईरान में सत्ता पर वार: अमेरिका-इजरायल के निशाने पर खामेनेई कैसे बने सुप्रीम लीडर? - News Summed Up

ईरान में सत्ता पर वार: अमेरिका-इजरायल के निशाने पर खामेनेई कैसे बने सुप्रीम लीडर?


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर एक बार फिर हमले किए हैं। इन हमलों के बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही बातचीत फिर पटरी से उतर गई है। ताजा हमलों ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या इनका मकसद ईरान की सुरक्षा और शीर्ष नेतृत्व को कमजोर करना है।शनिवार को हुए हमलों में राजधानी तेहरान के कई इलाकों को निशाना बनाया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ हमले उन जगहों के पास हुए जो ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई से जड़ी बताई जाती हैं। खामेनेई के दफ्तर के पास धमाका ईरान की समाचार एजेंसी तसनीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, सात मिसाइलें उत्तरी तेहरान के शेमिरान इलाके में राष्ट्रपति भवन के पास और खामेनेई के परिसर के नजदीक गिरीं। वहीं असोसिएटेड प्रेस ने बताया कि हमले खामेनेई के दफ्तरों के आसपास हुए।खामेनेई इस समय कहां हैं, यह साफ नहीं है। रॉयटर्स ने एक सूत्र के हवाले से बताया कि वह तेहरान में नहीं हैं और उन्हें किसी सुरित स्थान पर भेज दिया गया है। बता दें, 86 वर्षीय खामेनेई 1989 से ईरान के सुप्रीम लीडर हैं।कैसे सुप्रीम लीडर बने खामेनेई? उन्होंने इस पद पर अयातुल्लाह रुहोल्लाह खामेनेई की जगह ली थी, जिन्होंने 1979 की इस्लामिक क्रांति के नेतृत्व किया था। उस क्रांति में अमेरिका समर्थित शाह मोहम्मद रेजा पहलवी की सत्ता खत्म हुई थी। सुप्रीम लीडर के तौर पर खामेनेई के पास सरकार, सेना और न्यायपालिका पर अंतिम अधिकार है। वह देश के आध्यात्मिक नेता भी हैं। उनके शासन में ईरान ने पश्चिमी देशों के साथ तनाव, कड़े प्रतिबंधों और देश के भीतर आर्थिक व अधिकारों को लेकर कई विरोध प्रदर्शनों का सामना किया है।खामेनेई की ताकत का बड़ा आधार दो प्रमुख सुरक्षा संस्थान हैं- इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर्प्स (IRGC) और बासिज अर्धसैनिक बल। इन संगठनों में लाखों स्वयंसेवक जुड़े हुए हैं। ईरान का परमाणु कार्यक्रम खामेनेई का कहना है कि ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और उसका परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उपयोग के लिए है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था को अब तक ऐसे सबूत नहीं मिले हैं कि ईरान परमाणु बम बना रहा है। हालांकि इजरायल और अमेरिका के कुछ नेता लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं।इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने जून में कहा था कि खामेनेई 'अब अस्तित्व में नहीं रह सकते।' उसी महीने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संकेत दिया था कि उन्हें निशाना बनाने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भी हाल के महीनों में खामेनेई को लेकर सख्त बयान दिए हैं।


Source: Dainik Jagran February 28, 2026 14:57 UTC



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