Hindi NewsLocalUttar pradeshKanpurKanpur, Kanpur News, Kanpur Today News, Kanpur Breaking News, Kanpur Big News, Kanpur Hindi News, Kanpur Bhaskar News, Kavi Saumendra Raj, Kavi Saumendra Raj News, Kavi Saumendra Raj Latest News, Kavi Saumendra Raj Big News, Kavi Saumendra Raj Bhaskar News, Will Mesmerize People With His Poems On Radio Mauritius On July 10कानपुर के कवि मॉरीशस के रेडियो में देंगे आवाज: 10 जुलाई को रेडियो मॉरीशस में अपनी कविताओं से करेंगे लोगों को मंत्रमुग्धकानपुर 18 घंटे पहलेकॉपी लिंकरेडियो स्टूडियो में कविता की प्रस्तुति देते सौमेंद्र राज त्रिपाठी।कानपुर शहर के दबौली निवासी सौमेंद्र राज त्रिपाठी अपनी कविताओं से लोगों को मंत्रमुग्ध करेंगे। वह भारत की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में इंजीनियर है और कार्यालय संबंधित काम से इन दिनों वह मॉरिशस में है। बचपन से ही कविताओं के लिखने, पढ़ने के शौक ने आज उन्हें एक नई पहचान दिलाई है। मॉरीशस में रहकर इंजीनियरिंग जरूर कर रहे हैं लेकिन उन्हें लोग कवि सौमेंद्र राज के नाम से जानते हैं।10 जुलाई को होगा लाइव प्रसारणसौमेंद्र मॉरीशस के एक रेडियो मॉरीशस नामक स्टेशन में 10 जुलाई को शाम 4 बजे (मॉरीशस के समय अनुसार) अपना कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने कई कविताएं इसके लिए तैयार कर रखी हैं। जिसे सुनाकर वह विदेशों में रहने वाले लोगों को भी अपना दीवाना बनाएंगे।बचपन से ही कविताओं का लिखने, पढ़ने का था शौक।सौमेंद्र ने बताया कि मॉरीशस आने के बाद मैंने सोचा कि क्यों ना अपनी कविताओं को यहां के लोगों को सुनाऊ। जिसके बाद मैंने कुछ भारतीय लोगों से संपर्क करना शुरू किया। 4 महीने के अंदर मुझे सफलता मिल गई और अब मेरा यहां पर लाइव प्रसारण होने जा रहा है। यहां तक पहुंचने का जिन लोगों को हाथ है उन्हें भी सौमेंद्र ने धन्यवाद दिया।मेरा पहला लाइव प्रसारण होने जा रहा है।कक्षा 10 से पढ़ रहा हूं कवितासौमेंद्र ने बताया कि 2005 में मैं हाई स्कूल की पढ़ाई कर रहा था। उसी दौरान मैंने कविता पढ़नी शुरू की। स्कूल कॉलेज में कभी कोई प्रोग्राम हुआ तो मंच पर आकर कविता पढ़ देता था, लेकिन कभी बड़ा मंच नहीं मिला। 2012 में मैंने बीटेक की पढ़ाई पूरी की और गुड़गांव 2016 में आ गया। यहां पर मैं एक सॉफ्टवेयर कंपनी में था। इसके बाद यहां पर मुझे कई प्लेटफार्म मिले। 2017 में पहली बार दिल्ली स्थित द्वारिका में मुझे सबसे बड़ा प्लेटफार्म मिला, जहां पर हजारों की संख्या में भीड़ थी। वहां मेरी कविताएं लोगों ने खूब पसंद की। इसके बाद मैं आगे बढ़ता चला गया।2017 में पहली बार दिल्ली स्थित द्वारिका में मुझे सबसे बड़ा प्लेटफार्म मिला।फरवरी में पहुंचा मॉरीशससौमेंद्र ने बताया कि फरवरी 2023 में मैं मॉरीशस आया। यहां पर इंजीनियरिंग के साथ-साथ उन्होंने कुछ भारतीय लोगों से भी मुलाकात करनी शुरू की। यहां पर उन्होंने लोगों को अपनी कविताएं सुनाई जो लोगों को खूब पसंद आई। इसके बाद सौमेंद्र ने रेडियो में आने की बात कही। वहां के लोगों की मदद से अब सौमेंद्र अपनी एक नई पहचान बनाने जा रहे है।फरवरी 2023 में मैं मॉरीशस आया था।मातृभाषा को मिले सम्मानसौमेंद्र ने कहा कि मेरा मकसद है कि मैं जहां भी रहूं वहां अपनी मातृभाषा को सम्मान दिला सकूं। इसी उद्देश्य से मैं आगे बढ़ रहा हूं। यहां भी मुझे यही करना है, हालांकि मैं देखता हूं कि विदेशों में भारतीय लोगों की बहुत इज्जत है।सौमेंद्र की कुछ खास कविताएं1- घर का आईना....मेरे खेलने का वो आंगन कहां हैऐ मेरे पुराने घर के उम्रदराज आईने बता मेरा बचपन कहां है.....वो आंखों और माथें पर चमकता काजल और सावन में बे-बुनियाद गरजता बादलकहां गई वो होली वाली रंग भरी पिचकारी बिगड़ गई गिनती से भरी घर की दिवाले सारीवो "मां" के स्कूल छोड़ने पर आंसूओं का आना और छुट्टी का वक़्त आते देख मन ही मन मुस्कानावो पापा के दफ्तर जाते ही गुल्ली गेंद निकलना और घर की पहली देहरी बिना पर वजह फिसलनावो बुआ के आते ही कुछ सिक्कों का लालच आना और मामा के जाते ही पूरा नाश्ता खा जानाये कैसा समय आया अब तो लगती पूरनमासी भी काली न कहां चली गई वो छुर छुरिया भरी दिवालीये कैसी जिंदगी है ये कौन सा किनारा है आज सा सारा जीवन उस छुटपन का बलिहारा हैये पूरी दुनिया नई और पूरा नया जहां है अब मेरे घर का उम्रदराज आईना "ना" बता पाएगा की मेरा बचपन कहां है मेरा बचपन कहां है.......2- विदा की वेदना....अभी दिनभर हसाती है, कभी दम भर रुलाएगी।ये बेटी है मेरे घर की, पराये घर को जाएगी।सलीका खुद से जीने का, हमे जिसने सिखाया था। पकड़कर उंगलियों को जब, उसे चलना सिखाया था। उमर जितनी बढ़ेगी अब, ये उतना सताएगी। ये मेरे बेटी है मेरे घर की, पराये घर को जाएगी।ये रौनक घर के बागों की, महक में छोड़ जाएगी सुखों की अनगिनत किश्ती, भंवर में मोड़ जाएगी। चहक आंगन में चिड़िया की, कहो कैसे अब आएगी। ये बेटी है मेरे घर की, पराये घर को जाएगी।आंचल ममता का जिसने, जनम से ही गवाया था। बचपन बांध चुटिया में, मकां को घर बनाया था। हंसाया जिसने जीवन मे, उमर भर वो रुलाएगी। ये बेटी है मेरे घर की, पराये घर को जाएगी।लगाकर हर तिलक चौखट, भिगोंकर हाथ रोली में। रंगेंगी पग महावर में, धर श्रृंगार डोली में। पिया का थामकर दामन, पीहर को छोड़ जाएगी। ये बेटी है मेरे घर की, पराये घर को जाएगी।ये बैठ चार कांधो में, संग कांहार जाएगी। कलम रोको सौमेन्द्र की, ये कितने गम दिखाएगी। कभी दिनभर हसाती थी, अभी हर दम रुलाएगी। ये बेटी है मेरे घर की, पराये घर को जाएगी।
Source: Dainik Bhaskar July 07, 2023 16:18 UTC