सही आचरण के साथ किए गए कार्य हम उच्च अवस्था में ले जा सकते हैं इसलिए भगवद गीता हमें क्रियाओं पर आधारित योग की एक संपूर्ण शक्तिशाली प्रणाली कर्मयोग से परिचित कराती है। आपके कर्म, आपके सीखने, विकास और शांति का माध्यम तभी बन सकते हैं जब आप अपने कर्मों की गति में सेवा, कृतज्ञता, निस्वार्थता का भाव लाएं। कैसे? बता रही हैं डॉ हंसा योगेंद्रडॉक्टर हंसा योगेंद्र डॉक्टर हंसा योगेंद्र
Source: Navbharat Times July 30, 2021 19:00 UTC