रजत भट्ट/गोरखपुर: शहर में एक मुरब्बा गली है, नाम सुनकर ऐसा लगता होगा कि यहां सिर्फ मुरब्बे ही मिलते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. इसी इकलौती मुरब्बा की दुकान चलाने वाले प्राणनाथ गुप्ता ने बताया कि 150 साल पहले उनके दादा श्यामा प्रसाद ने मुरब्बा बेचने की शुरुआत की थी. दादा जी चंदन का मुरब्बा, अमरूद का मुरब्बा, सेब का मुरब्बा और न जाने कितने प्रकार के मुरब्बे बेचा करते थे. आज भी मौजूद है बास का मुरब्बाआज भी मुरब्बे गली में मुरब्बे की दुकान पर प्राणनाथ करीब 10 से अधिक वैरायटी के मुरब्बे बेचते हैं. इसमें बांस का मुरब्बा, आम का मुरब्बा, बेल का मुरब्बा, सेब का मुरब्बा, गन्ने का मुरब्बा और भी कई प्रकार के मुरब्बे हैं.
Source: NDTV August 11, 2023 05:59 UTC