आगरा (गौरव भारद्वाज)। सुबह हो या शाम या फिर दोपहर। सिर पर हेलमेट लगाए साइकिल चलाते हुआगरा, (गौरव भारद्वाज)। सुबह हो या शाम, या फिर दोपहर। सिर पर हेलमेट लगाए साइकिल चलाते हुए कई लोग मिल जाएंगे। बाजार से सामान खरीदना है या जाना हो कार्यालय, यहां के लोग साइकिल पर चलना पसंद करते हैं। ऐसा नहीं है कि इनके पास चार पहिया वाहन नहीं है। मगर, तंदुरस्त रहने और वाहनों के धुंए से फैलते पर्यावरण प्रदूषण को बचाने के लिए उनका ये सराहनीय संदेश होता है। कहा जाए तो साइकिलिंग इस क्षेत्र के लोगो की जीवनशैली बन चुकी है।आधुनिकता के साथ ही सामाजिक सरोकारों से गहरे ताल्लुकात रखने वाले ये क्षेत्र है दयालबाग। आगरा शहर के किनारे बसा है। दयालबाग क्षेत्र में तो लोग जाने-आने के लिए वर्षो से साइकिल का इस्तेमाल करते हैं। क्षेत्रीय निवासी सीनियर सिटीजन गुरुचरन दास बताते हैं कि वो कालेज के समय से ही साइकिल चला रहे हैं। पूरी नौकरी साइकिल से ही की है। कार भी है लेकिन, आज भी वो बाहर के सारे काम साइकिल से करते हैं। साइकिल चलाने से वो फिट हैं। उनका घुटने का दर्द रहता है, लेकिन साइकिल चलाने से उन्हें आराम मिलता है।दयालबाग निवासी एससी श्रीवास्तव (82) भी आज भी साइकिल से जाते-आते हैं। बताते हैं कि वो वर्ष 1945 से साइकिल चला रहे हैं। साइकिल से ही स्कूल और कालेज जाते थे। नौकरी लगी तब भी साइकिल नहीं छोड़ी। रिटायर्ड हुए 22 साल हो गए हैं, लेकिन उनकी साइकिल रिटायर नहीं हुई है। यहां के जे आनंद राव (82) भी अपने घर के सभी काम साइकिल से निपटाते हैं। चार-पांच किमी की दूरी तक वो साइकिल से ही जाते-आते हैं। सुबह-शाम सड़कों पर दिखती हैं साइकिलों की कतारेंदयालबाग क्षेत्र में लोग सुबह और शाम खेतों पर सेवा करने साइकिल से ही जाते हैं। इनमें बच्चे, महिला-पुरुष और बुजुर्ग सभी लोग होते हैं। चाहे डाक्टर हो या प्रोफेसर या बिजनेसमैन, यहां सब साइकिल बड़ी शान से चलाते हैं। लोगों का कहना है कि साइकिल चलाने से वो फिट रहते हैं।हर घर में मिलेगी साइकिलदयालबाग क्षेत्र में राधास्वामी सत्संग सभा से जुड़ीं पांच कालोनियां हैं। इन कालोनियों में करीब 1200 मकान हैं। यहां के हर घर में साइकिल मिल जाएगी। कई घर ऐसे हैं जिसमें सभी सदस्य साइकिल चलाते हैं। ऐसे घरों में चार से पांच साइकिल हैं। कालोनी में वाहनों को नो एंट्रीदयालबाग में पर्यावरण संरक्षण के लिए साइकिल का प्रयोग किया जाता है। यहां की कालोनियों में वाहनों का प्रवेश नहीं है। कालोनी में जाने के लिए साइकिल का प्रयोग करना होता है। साइकिल चलाना शरीर को फिट रखने का असरदार तरीका है। इससे हृदय रोग, स्ट्रोक और शुगर जैसी बीमारियों से बचाव होता है। जो लोग व्यायाम नहीं कर पाते, उनके लिए साइकिलिग बेहतर विकल्प है।-डा. मुकेश गोयल, वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ, आगरासाइकिलिंग से प्रगाढ़ हुई हमारी दोस्तीवर्ष 2012 में हम दोनों ने साइकिलिग शुरू की जो आज तक बरकरार है। हम दोनों रोज सुबह और शाम 15 से 20 किमी साइकिल चलाते हैं। साइकिल फिट रखने का जरिया है। साइकिलिंग से पूरे दिन शरीर में ताजगी रहती है। बीमारी भी साइकिलिग से दूर रहती हैं। साइकिलिग के चलते ही हमारी दोस्ती भी प्रगाढ़ हो गई। लोगों को भी साइकिलिंग करनी चाहिए। बाजार आदि के कार्य तो साइकिल से ही निपटाने चाहिए।-आशुतोष शुक्लावाइस चेयरमैन, गिर्राज महाराज ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशंस, मथुरा- संजीव अग्रवालसीए, मथुरा30 वर्षों से साइकिल से ही जाता हूं क्लीनिकफोटो 1730 साल हो गए, मैं अपने क्लीनिक साइकिल से ही जाता हूं। साइकिल से जाने में कोई झिझक नहीं होती। बाहर जाने के लिए ही कार का इस्तेमाल करता हूं। मेरे जीवन का मूल मंत्र है डाइट, एक्सरसाइज और स्लीप। एक्सराइज के लिए साइकिल से अच्छा कुछ भी नहीं है। इससे शरीर का पूरा व्यायाम होता है। आधुनिकता की होड़ में लोग साइकिल से दूरी बनाने लगे हैं। एक्सरसाइज छूटने से बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। शरीर की फिटनेस के लिए साइकिलिग बेस्ट एक्सरसाइज है।-डा.सुशील गुप्तावरिष्ठ फिजीशियन, विभव नगर, फीरोजाबाद------------------------------सेहत के लिए जरूरी है साइकिलिग--फोटो 1817 वर्ष की उम्र से लान टेनिस खेलना शुरू किया। इसके बाद सुबह से सैर पर साइकिल से जाने लगा। सुबह की एक्सरसाइज अब साइकिलिग ही है। सात बजे अपने आवास से साइकिल पर निकलते हुए और लगभग पांच किमी तक साइकिल से ही घूमता हूं। इससे पूरे शरीर का व्यायाम हो जाता है। लोगों को भले ही साइकिल पर जाने से झिझक महसूस होती हो, लेकिन मेरा तो पसंदीदा वाहन साइकिल ही है।- प्रदीप गुप्ता, प्रमुख उद्यमी, यूपीसीए के कार्यवाहक अध्यक्ष, फीरोजाबादशॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप
Source: Dainik Jagran June 02, 2021 18:33 UTC