घोटाला: मंत्री अनिल विज के आदेश के बाद नगर निगम ने इंजीनियरिंग विंग के चार अधिकारियों और तीन ठेकेदारों के खिलाफ पुलिस में दर्ज कराई FIR - News Summed Up

घोटाला: मंत्री अनिल विज के आदेश के बाद नगर निगम ने इंजीनियरिंग विंग के चार अधिकारियों और तीन ठेकेदारों के खिलाफ पुलिस में दर्ज कराई FIR


Hindi NewsLocalDelhi ncrGurgaonAfter The Order Of Minister Anil Vij, The Municipal Corporation Lodged An FIR Against Four Officers Of The Engineering Wing And Three Contractors With The Police. घोटाला: मंत्री अनिल विज के आदेश के बाद नगर निगम ने इंजीनियरिंग विंग के चार अधिकारियों और तीन ठेकेदारों के खिलाफ पुलिस में दर्ज कराई FIRगुड़़गांव 11 घंटे पहलेकॉपी लिंकगुड़गांव नगर निगम पहुंचे मंत्री अनिल विज।एक दर्जन से अधिक विकास कार्यों में अधिकारियों द्वारा ठेकेदारों के साथ मिलकर घोटालागुड़गांव नगर निगम इंजीनियरिंग विंग्स में लंबे समय से हो रहे घोटालों को लेकर शुक्रवार को प्रदेश के गृह एवं शहरी स्थानीय निकाय मंत्री अनिल विज के आदेश पर बड़ी कार्रवाई की गई। निगम के चीफ इंजीनियर की शिकायत पर पुलिस ने इंजीनियरिंग विंग के चार अधिकारियों और तीन ठेकेदारों सहित कुल 7 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। एक दर्जन से अधिक विकास कार्यों में अधिकारियों द्वारा ठेकेदारों के साथ मिलकर घोटाला करने के इन मामलों में ज्वाइंट कमिश्नर की जाच रिपोर्ट के 9 महीने बाद FIR दर्ज की गई है। इससे पहले इन मामलों को दबाने की पूरी कोशिश की जा रही थी। आगे की कार्रवाई के तहत इन अधिकारियों को निलंबित किए जाने और गिरफ्तारी की भी संभावना बनी हुई है।मंत्री अनिल विज ने गुरुवार को नगर निगम गुरुग्राम कार्यालय का औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने विकास कार्य करवाए बिना ठेकेदारों को करो रुपए के भुगतान किए जाने के मामले में संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ FIR दर्ज कराने के आदेश दिए थे। जिस पर कार्रवाई करते हुए निगम कमिश्नर मुकेश कुमार आहूजा के आदेश पर चीफ इंजीनियर ठाकुर लाल शर्मा की शिकायत पर पुलिस ने शुक्रवार को एक्सईएन गोपाल कलावत व पंकज सैनी, एसडीओ विक्की कुमार और जेई विनोद के साथ संबंधित ठेकेदार दिलावर सिंह, राजकुमार, पवन बल्हारा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।पिछले वर्ष निगम कमिश्नर को मिली थी शिकायतनगर निगम के इंजीनियरिंग ब्रांच में विकास कार्यों से सम्बंधित पेमेंट को लेकर अधिकारियों की मिलीभगत से लंबे समय से घोटाला चल रहा था। पिछले वर्ष इन घोटाले की शिकायत मिली थी, जिस पर तत्कालीन निगम कमिश्नर विनय प्रताप सिंह ने जांच के आदेश दिए थे। उन्होंने जांच के लिए ज्वाइंट कमिश्नर प्रदीप अलाहवत को जिम्मेदारी सौंपी थी। उच्च अधिकारियों को भरोसा था कि ज्वाइंट कमिश्नर इस मामले में सकारात्मक रिपोर्ट देंगे और मामला दब जाएगा, मगर ज्वाइंट कमिश्नर ने अपनी जांच रिपोर्ट के सभी अधिकारियों और संबंधित ठेकेदारों को दोषी करार दिया।ज्वाइंट कमिश्नर ने सभी पहलुओं की जांच करते हुए अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट बीते नवम्बर 2020 को तत्कालीन निगम कमिश्नर विनय प्रताप सिंह को सौंप दी थी। उन्होंने इस संबंध में सभी संबंधित विभागों से संबंधित रिपोर्ट अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की थी। मगर ज्वाइंट कमिश्नर की रिपोर्ट पर किसी प्रकार के सख्त कार्रवाई नहीं की गई। उल्टा सभी संबंधित अधिकारियों प्रोत्साहित किया गया।जांच अधिकारी की रिपोर्ट में हुई थी पुष्टिजांच अधिकारी ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में खुलासा किया था कि संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों ने मिलकर फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करके नगर निगम को करोड़ों रुपए की चपत लगाई है। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि विभिन्न वार्डो में जेई से लेकर एक्सईएन तक के अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करके ठेकेदार को करोड़ों रुपए का गलत भुगतान करवाने भागीदारी निभाई है।शुक्रवार को पुलिस में दर्ज 8 पन्नों की FIR में ज्वाइंट कमिश्नर की जांच रिपोर्ट की पूरी विस्तृत जानकारी दी गई है। इसमें दर्ज किया गया है कि अधिकारियों ने ठेकेदार को पेमेंट के लिए वार्ड से सम्बंधित पार्षदों के फर्जी संतुष्टि पत्र प्रस्तुत किए। अधिकारियों ने मेजरमेंट बुक्स में फर्जी एंट्री की, इसके साथ ही फर्जी बिल प्रस्तुत करके डेवलपमेंट वर्क से संबंधित भुगतान करने का काम किया। पुलिस में दर्ज रिपोर्ट में सभी संबंधित अधिकारियों और वार्ड से संबंधित पार्षदों के बयान भी दर्ज किए गए हैं इसमें पूरी कोशिश की गई है कि इस बार घोटालेबाज अधिकारी और ठेकेदार किसी तरह से भी बच नहीं पाए।


Source: Dainik Bhaskar July 23, 2021 16:30 UTC



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