कई मुकदमों में सजा होने के बाद 2027 में आजम खां या उनके बेटे अब्दुल्ला का चुनाव लड़ना नामुमकिन है। ऐसे में आजम खां की सियासी अदावत के बाद भी जयाप्रदा का रामपुर की राजनीति में सक्रिय होना ज्यादा जोखिम भरा कदम शायद ही रहे।हरिशंकर जोशी, वरिष्ठ पत्रकार
Source: Navbharat Times March 24, 2026 21:33 UTC