ज्वार की फसल से किसानों को दोहरा लाभ, होगी मानव व पशु आहार की व्यवस्था - News Summed Up

ज्वार की फसल से किसानों को दोहरा लाभ, होगी मानव व पशु आहार की व्यवस्था


अगर आप खेती करने की सोच रहे हैं तो ऐसे में आप ज्वार की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं यह फसल आपको अच्छी सेहत के साथ मोटा मुनाफा भी देगीज्वार मुख्य रूप से खरीफ की एक प्रमुख मिलैट फसलों में से एक है। जिसे किसान भाई खाने के साथ-साथ चारे एवं दाने के रूप में उगाते हैं तथा ज्वार को मोटे अनाजों का राजा भी कहा जाता है। उत्तर प्रदेश में ज्वार की फसल मुख्य रूप से चारे के लिये उगाई जाती है। ज्वार का इस्तेमाल चारे के रूप में किया जाता है। जानवरों को हरे चारे एंव सूखे चारे तथा साइलेज बनाकर खिलाया जाता है। इस प्रकार ज्वार जानवरों का महत्वपूर्ण एंव पौष्टिक चारा है। गेहूं की तरह ज्वार को भी आटे के रूप में प्रयोग करते हैं। ज्वार में शर्करा की काफी मात्रा पाई जाती है तथा ज्वार की अच्छी फसल के लिये मृदा का पी.एच. 1 लीटर प्रति हेक्टेयर का छिडकाव करें।तनाछेदक कीटः- इस कीट की सुंडियां तनें में छेद करके अन्दर ही अन्दर खाती रहती है। जिससे बीज का गोभ सूख जाता है। इसके उपचार हेतु क्विनालफास 25 प्रतिशत ई.सी. 1.50 लीटर को 500 से 600 लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करें।ईयर हेड मिजः- प्रौढ मिज लाल रंग की होती है और यह पुष्प पत्र पर अण्डे देती है। लाल मैगेट्स दानों के अन्दर रहकर उसका रस चूस लेती है, जिससे दाने सूख जाते हैं। इसके उपचार के लिये किसान भाई इन्डोसल्फान 35 ई.सी. नदीम खान (कृषि विभाग) इंटीग्रल इंस्टीट्यूट आफ एग्रीकल्चरल साईंस एण्ड टेक्नोलाजी (आई.आई.एस.टी), इंटीग्रल यूनिवर्सिटी लखनऊ (उ.प्र.) डा0 अहमद शाहनवाज (कृषि विभाग) इंटीग्रल इंस्टीट्यूट आफ एग्रीकल्चरल साईंस एण्ड टेक्नोलाजी (आई.आई.एस.टी.


Source: Dainik Jagran June 17, 2023 11:18 UTC



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