डाॅक्टर्स डे के उपलक्ष्य में मरीज बोले: जिसने मेरी जिंदगी बचाई वह वास्तव में डाॅक्टर नहीं भगवान का रूप हैं - News Summed Up

डाॅक्टर्स डे के उपलक्ष्य में मरीज बोले: जिसने मेरी जिंदगी बचाई वह वास्तव में डाॅक्टर नहीं भगवान का रूप हैं


Hindi NewsLocalDelhi ncrFaridabadThe One Who Saved My Life Is Not Really A Doctor But A Form Of Godडाॅक्टर्स डे के उपलक्ष्य में मरीज बोले: जिसने मेरी जिंदगी बचाई वह वास्तव में डाॅक्टर नहीं भगवान का रूप हैंफरीदाबाद 16 घंटे पहलेकॉपी लिंकफरीदाबाद। डॉक्टर्स की टीम के साथ ठीक होने वाले मरीज।भगवान के बाद धरती पर अगर किसी को भगवान का दर्जा दिया जाता है तो वे हैं डॉक्टर। जब कोई मरीज जिंदगी और मौत से जूझ रहा होता है तब उसे डॉक्टर में भगवान की झलक दिखाई देती है क्योंकि एक जिंदगी देने वाला होता है तो दूसरा जिंदगी को बचाने वाला। डॉक्टर्स डे के उपलक्ष्य में गंभीर बीमारी से ठीक हो चुके कुछ लोगों से बात की तो उन्होंने कहा कि जिसने मेरी जिंदगी बचाई वह वास्तव में डाॅक्टर नहीं भगवान का रूप हैं।फरीदाबाद निवासी किशन सिंह के अनुसार अभी मैं कोविड की लंबी बीमारी से उभर ही रहा था की एक दिन मुझे आंखों के पीछे दर्द का अहसास होने लगा। शुरू के कुछ दिन मुझे साधारण दर्द लगा लेकिन इसके बाद दर्द बढ़ता गया। इसके बाद मैं सर्वोदय अस्पताल के नाक, कान, गला विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रवि भाटिया से मिला। इसके बाद मेरी कुछ जांच हुईं। मुझे ब्लैक फंगस का शक था और वह शक यकीन में तब बदल गया जब जांच रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई। मेरी आंख में सूजन बढ़ रही थी और मुझे सब कुछ डबल दिखाई देने लगा था। मेरे हॉस्पिटल में कई बार ऑपरेशन हुए। इसमें संक्रमित हिस्सों से ब्लैक फंगस को साफ किया गया। मेरी आंख के पास से भी ऑपरेशन किया गया और आंख की रोशनी को बचाते हुए वहां से ब्लैक फंगस के संक्रमण को हटाया गया। अपने इलाज के दौरान में और मेरा पूरा परिवार बस एक ही शब्द कह रहा था वह था थैंक्यू डॉक्टर्स।ग्रेटर फरीदाबाद निवासी वी प्रसाद की भी इसी तरह की कहानी है। कोविड बीमारी के बाद आधे सिर में दर्द के साथ दांत हिलने लगे और जबड़े में सूजन तेजी से बढ़ने लग गई थी और आंख की रोशनी भी धुंधली होने लगी थी। सर्वोदय हॉस्पिटल में एडमिट होने के बाद ब्लैक फंगस का इलाज चलने लगा। इस दौरान दवाई मिलने में भी बड़ी परेशानी आ रही थी। पर न मैंने हिम्मत हारी न डॉक्टरों ने साथ छोड़ा। 40 दिन के लम्बे इलाज के बाद जब डॉ. रवि भाटिया, डॉ. विश्वजीत बनिक और डॉ. गौरव सपरा ने जब मुझे घर जाने के लिए डिस्चार्ज किया तो तब मेरे और मेरे परिवार के मुंह से सिर्फ एक शब्द निकला और वह था थैंक्यू डॉक्टर्स।


Source: Dainik Bhaskar June 30, 2021 13:10 UTC



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