दो-तीन दशक पहले जमीन के तपे युवा पत्रकार बनते थे, आज बड़े बाप के बच्चे या असरदार पति की बीवीयाँ पत्रकार बनती है! - News Summed Up

दो-तीन दशक पहले जमीन के तपे युवा पत्रकार बनते थे, आज बड़े बाप के बच्चे या असरदार पति की बीवीयाँ पत्रकार बनती है!


सुमंत कबीर-आदरणीय और जनसत्ता के अग्रज Surendra Kishore जी के संस्मरण पढ़ रहा था, इसी बहाने कुछ कहने को याद आ गया। सोचा, साझा कर लूं।जब कोई मित्र या युवा पूछता है, आपके समय और आज की पत्रकारिता में क्या अंतर आया? हर असरदार क्यों मीडिया से जुड़ा है..? सत्ता संघर्ष में सूचना के कारोबार की क्या भूमिका है? आखिर में आप, खासकर युवा तय करें, इस भीषण महाभारत में क्या पाने जा रहा है? या फिर जन्म ही ट्रोल बनने के लिए हुआ?


Source: NDTV February 15, 2026 11:46 UTC



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