परिवर्तनी एकादशी पर करवट लेते हैं भगवान विष्‍णु, जानिए महत्‍व और अन्य खास बातें - News Summed Up

परिवर्तनी एकादशी पर करवट लेते हैं भगवान विष्‍णु, जानिए महत्‍व और अन्य खास बातें


4 /6 पद्म एकादशी की कथात्रेतायुग में बली नामक एक असुर राजा था, लेकिन वह भगवान विष्णु का परम भक्त था। विविध प्रकार के वेद सूक्तों और याचनाओं से प्रतिदिन भगवान का पूजन किया करता था। नित्य विधिपूर्वक यज्ञ आयोजन करता और ब्राह्मणों को भोजन कराता था। वह जितना धार्मिक था उतना ही शूरवीर भी। एक बार उसने इंद्रलोक पर अधिकार स्थापित कर लिया।स्वर्ग लोक देवताओं से छिन जाने से देवतागण परेशान होकर भगवान विष्णु के पास गए। देवगुरु बृहस्पति सहित इंद्र देवता प्रभु के निकट जाकर हाथ जोड़कर वेद मंत्रों द्वारा भगवान की स्तुति करने लगे। तब भगवान विष्णु ने उनकी विनती सुनी और संकट टालने का वचन दिया। अपने वचन को पूरा करने के लिए उन्होंने वामन रूप धारण करके अपना पांचवां अवतार लिया और राजा बली से सब कुछ दान स्वरूप ले लिया।भगवान वामन का रूप धारण करके राजा बली द्वारा आयोजित किए गए यज्ञ में पहुंचे और दान में तीन पग भूमि मांगी। इस पर राजा ने वामन का उपहास करते हुए कहा कि इतने छोटे से हो, तीन पग भूमि में क्या पाओगे? लेकिन वामन अपनी बात से अडिग रहे। इस पर राजा ने तीन पग भूमि देना स्वीकार किया और दो पग में धरती और आकाश माप लिए। इस पर वामन ने तीसरे पग के लिए पूछा कि राजन अब तीसरा पग कहां रखूं, इस पर राजा बली ने अपना सिर आगे कर दिया, क्योंकि वह पहचान गए थे कि वामन कोई और नहीं स्वयं भगवान विष्णु हैं।165 साल बाद अद्भुत योग: 1 से 17 सितंबर तक श्राद्धपक्ष, नवरात्र 17 अक्टूबर से शुरू


Source: Navbharat Times August 27, 2020 14:26 UTC



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