होश उड़ा देने वाला खुलासा कोरोना से संक्रमित मरीजों (Coronavirus Cases in India) के इलाज में कारगर इंजेक्शन 'रेमडेसिविर' की बढ़ती मांग को देखते हुए सीमावर्ती इलाके में नकली 'रेमडेसिविर' बनाकर बिक्री करने वाले गिरोह सक्रिय हो गए हैं। नेपाल की मौरंग जिला पुलिस ने 90 रुपये कीमत वाले एंटिबायोटिक इंजेक्शन 'स्टासेफ' में नया लेबल लगाकर 7 से 25 हजार रुपये में नकली 'रेमडेसिविर' बनाकर बेचने के धंधे का खुलासा किया है जिससे स्वास्थ्यकर्मी समेत आमलोगों के होश उड़ गए हैं।'स्टासेफ' और 'रेमडिसिविर' के वायल का एक ही साइज एंटीबायोटिक दवा स्टासेफ और कोरोना के इलाज में कारगर रेमडेसिविर इंजेक्शन के डिब्बे का एक ही साइज होने का फायदा नकली दवा के कारोबारी उठा रहे थे। इन लोगों के सम्पर्क में आने वाले मरीजों को सात से 35 हजार रुपये लेकर रेमडेसिविर के लेबल लगा स्टासेफ इंजेक्शन थमा दिया जाता था। एसपी खड़का ने बताया कि गिरफ्तार फार्मेसी संचालक सोनू आलम यह नकली रेमडेसिविर कहां से लाता था, इसकी जानकारी पुलिस जांच के बाद ही मिल पाएगी। वहीं पुलिस सूत्रों की मानें तो भारी मात्रा में स्टासेफ इंजेक्शन विराटनगर की होलसेल दवा दुकान गणेश ड्रग्स हाउस से खरीदा गया था।पहले रेमडेसिविर की तस्करी में धराया, जमानत मिली तो बनाने लगा नकली 'रेमडेसिविर' पकड़े गए नकली दवा कारोबारियों का नाम पहले भी दवा तस्करी में आया था। इससे पहले टिकुलिया से सटे नेपाल के दरहिया से श्रवण यादव को भारत से रेमडेसिविर इंजेक्शन की तस्करी में दवा के साथ पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उस समय राजनीतिक दबाव के बाद जमानत पर रिहा हुआ था। जोगबनी के रास्ते पूर्णिया तक फैला है जाल सूत्रों की मानें तो इन नकली दवा तस्कर के कुछ आरोपी अररिया जिले के बथनाहा में भी बैठे हैं। जिसके माध्यम से सम्पर्क स्थापित कर नकली रेमडेसिविर को अस्पताल में भर्ती मरीजों तक सप्लाई किया जाता है। इसके लिए जोगबनी के बथनाहा में झोला छाप डॉक्टर के साथ ही सीमांचल में दर्जनों नकली दवा के सौदागर सक्रिय हैं। सूत्रों पर यकीन करें तो इनके जरिए इस्लामपुर में बनाए गए अवैध रास्ते और टिकुलिया के रास्ते दवा की तस्करी पुलिस को चकमा देकर की जाती है।
Source: Navbharat Times May 08, 2021 05:38 UTC