बैंक एफडी या स्मॉल सेविंग स्कीम, कहां निवेश करना बेहतर होगा? - News Summed Up

बैंक एफडी या स्मॉल सेविंग स्कीम, कहां निवेश करना बेहतर होगा?


निवेश की सुरक्षा बैंक एफडी (Bank FD) तथा छोटी बचत की योजनाएं (Small Saving Schemes), दोनों में निवेशकों को फंड की सुरक्षा (Safety of Fund) प्रदान की जाती है। पूंजी की उच्च सुरक्षा के साथ बैंक डिपाज़िट पर मध्यम रिटर्न मिलते हैं। स्थिर, बड़ी-पूंजी वाले बैंकों में डिपॉज़िट बहुत अधिक सुरक्षित होते हैं। भारत सरकार द्वारा सॉवरेन गारंटी के कारण छोटी बचत स्कीमों में निवेश बहुत सुरक्षित है। इसलिए, इनमें लगभग कोई जोखिम नहीं होता है।5 साल से कम अवधि के निवेश पर ब्याज दरें मौजूदा समय में पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉज़िट्‌स पर 1 वर्ष से 5 वर्ष के लिए 5.50% प्रतिवर्ष से 6.70% प्रतिवर्ष ब्याज दरें दी जाती हैं। एनएससी और एससीएसएस, जिनकी मैच्योरिटी अवधि 5 वर्ष की होती है, वर्तमान में क्रमश: 6.80% से 7.40% प्रतिवर्ष ब्याज दर की पेशकश कर रहे है। दूसरी ओर, वरिष्ठ नागरिकों के लिए 1 करोड़ रूपये से कम की राशि पर अधिकांश बैंक एफडी पर वर्तमान में 4.25% से 6.50% प्रतिवर्ष ब्याज दरें दी जाती हैं जबकि कुछ निजी बैंक और स्मॉल फाइनेंस बैंक 1 से 5 वर्ष की अवधियों के लिए 7.25% प्रतिवर्ष तक की थोड़ी उच्च ब्याज दर देते हैं।पांच साल से अधिक अवधि के निवेश पर ब्याज दरें पांच वर्ष से अधिक की मैच्योरिटी अवधियों (Maturity Period) के लिए छोटी बचत स्कीमों पर जैसे पीपीएफ (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना (Sukanya Samridhi Yojana), तथा केवीपी (KVP), (जिसकी मैच्योरिटी अवधि 124 महीनों की होती है) पर वर्तमान में क्रमश: 7.10%, 7.60%, तथा 6.90% प्रतिवर्ष ब्याज दर दी जाती है। लेकिन, 5 वर्ष से अधिक की मैच्योरिटी वाली अधिकांश बैंक एफडी (Bank FD) पर 4.80% से 6.50% प्रति वर्ष ब्याज दर दी जाती है।बैंक एफडी से ज्यादा ब्याज छोटी बचत में अधिकांश मामलों में बैंक एफडी की तुलना में छोटी बचत स्कीमों पर बेहतर ब्याज दर ऑफर की जाती है। लेकिन, बैंकों द्वारा अवधियों को चुनने के रूप में अधिक फ्लेक्सिबिलिटी के साथ निवेश विकल्प प्रदान किए जाते हैं, और साथ ही, ये 7 दिन से 1 वर्ष की अल्ट्रा-शॉर्ट अवधि के लिए भी निवेश की अनुमति देते हैं। साथ ही, वरिष्ठ नागरिक एफडी निवेशकों को लागू सामान्य दरों की तुलना में 50 बेसिस प्वाइंट अधिक ब्याज दर भी दी जाती है।लिक्विडिटी और लोन सुविधा पोस्ट ऑफिस टाइम डिपाज़िट के अलावा, अधिकांश छोटी बचत स्कीमों के साथ लॉक-इन की शर्त जुड़ी रहती है। दूसरी ओर, बैंक एफडी के लिए समय से पहले आंशिक या पूरे विथड्रॉवल लाभ मिलते हैं जिसका लाभ जुर्माने के रूप में ब्याज दर में थोड़ी कटौती के साथ उठाया जा सकता है। इसलिए, बैंक एफडी पर आमतौर पर छोटी बचत स्कीमों की तुलना में अधिक लिक्विडिटी मिलती है जिसमें टैक्स सेविंग एफडी को छोड़कर 5 वर्ष की मेंडेटरी लॉक-इन अवधि जुड़ी रहती है। और जहां तक लोन लेने की सुविधा की बात है, बैंक एफडी और छोटी बचत स्कीमों दोनों का इस्तेमाल नियम और शर्तों के अधीन लोन लेने के लिए गिरवी के रूप में किया जा सकता है।निवेश की पूरी अवधि में फिक्स्ड रिटर्न जैसा कि नाम से पता लगता है, बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीमों में निवेशकों को पूरी निवेश अवधि में समान ब्याज दर मिलती है, और इसे डिपाज़िट के शुरूआती समय में ही तय किया जाता है। छोटी बचत योजनाएं जैसे पोस्ट ऑफिस टाइम डिपाज़िट, राष्ट्रीय बचत पत्र एनएससी, तथा किसान विकास पत्र केवीपी में भी पूरी निवेश अवधि में समान ब्याज दर दी जाती है। लेकिन जब भी सरकार द्वारा ब्याज दरों में बदलाव किया जाता है, पब्लिक प्रोविडेंड फंड पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि योजना जैसी स्कीमों में ब्याज मौजूदा और नए निवेश के लिए बदलता रहता है। छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर को हर तिमाही में रिवाइज़ किया जाता है।टैक्स लाभ टैक्स-सेवर बैंक एफडी में आयकर अधिनियम की धारा 80C के अंतर्गत 1.5 लाख रूपये तक के टैक्स डिडक्शन लाभ की अनुमति दी जाती है; लेकिन उनको समय पूर्व विथड्रॉल नहीं किया जा सकता है, या उनके विरूद्ध लोन या ओवरड्राफ्ट नहीं मिलता है। छोटी बचत योजनाएं जैसे पीपीएफ और एनएससी के अंतर्गत भी निवेशकों को 80C के अंतर्गत कर लाभ मिलते हैं जो शर्तों को पूरा करने पर उनके विरूद्ध लोन भी ले सकते हैं। लेकिन सामान्य बैंक एफडी के साथ टैक्स-कटौती लाभ जुड़े नहीं रहते हैं। इसके साथ, उन पर मिलने वाली ब्याज आय पर निवेशक पर लागू होने वाले टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगाया जाता है। लेकिन, छोटी बचत योजनाओं जैसे पीपीएफ और एसएसवाई पर मिलने वाली ब्याज आय कर-मुक्त होती है, जबकि एनएससी, केवीपी और पांच-वर्षीय पोस्ट ऑफिस टाइम डिपाज़िट रिटर्न पर टैक्स लगाया जाता है।निवेश राशि से जुड़े राइडर्स पब्लिक प्रोविडेंड फंड (PPF) और सुकन्या समृद्धि योजना (SKY) जैसी छोटी बचत योजनाओं में अधिकतम निवेश की ऊपरी सीमा तय की गई है। आप उनमें एक वित्तीय वर्ष के दौरान 1.5 लाख रूपये से अधिक निवेश नहीं कर सकते हैं। एनएससी (NSC) में, आप 1.5 लाख से अधिक निवेश कर सकते हैं, लेकिन एक्सेस राशि पर टैक्स लाभ उपलब्ध नहीं हैं। एससीएसएस (SCSS) में कुल निवेश की उच्चतम सीमा 15 लाख रूपये है। लेकिन, जब आप कोई बैंक एफडी या पोस्ट ऑफिस फिक्स्ड डिपाज़िट स्कीम में निवेश करते हैं, तो कोई ऊपरी सीमा नहीं है।


Source: Navbharat Times May 29, 2021 08:03 UTC



Loading...
Loading...
  

Loading...

                           
/* -------------------------- overlay advertisemnt -------------------------- */