देश की जनता को गर्व की अनुभूति कराने वाले स्वतंत्रता दिवस के पावन पर्व पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री का संबोधन पूरे राष्ट्र का ध्यान आकर्षित करता है, क्योंकि उनके संबोधन से भारत की भावी दशा-दिशा रेखांकित होती है। इस बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लाल किले से दिए जाने वाले भाषण को लेकर उत्सुकता इसलिए अधिक थी, क्योंकि वह अपने दूसरे कार्यकाल में अंतिम बार राष्ट्र को संबोधित करने वाले थे।उन्होंने जिस तरह यह कहा कि वह अगले वर्ष भी इसी मंच से देश की जनता के समक्ष उपस्थित होंगे, उससे उनके आत्मविश्वास का भी पता चलता है और अपने एवं अपनी सरकार के प्रति जनता के भरोसे का भी। वास्तव में इस भरोसे ने ही प्रधानमंत्री को वह सामर्थ्य प्रदान की है जो देश को आगे ले जाने और इस क्रम में नए भारत का निर्माण करने में सहायक बनी है। संभवतः यही कारण रहा कि उन्होंने देश के लोगों को मेरे परिवार जन कहकर संबोधित किया। यह जनता से सीधे जुड़ाव का परिचायक भी है और राष्ट्र निर्माण में सबको साथ लेकर चलने की प्रतिबद्धता भी।प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देश की जनता को न केवल प्रेरित किया, बल्कि यह भरोसा भी दिलाया कि अनेक चुनौतियों के बावजूद भारत सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और विकसित राष्ट्र का सपना साकार होने को है। उन्होंने देश के लोगों में विश्व मंगल का जो भाव जगाया, वह भारत का मूल विचार है।भारत ने समस्त विश्व को अपना परिवार मानने की भावना का परिचय कोरोना काल में दिया ही, जी-20 समूह के ध्येय वाक्य के रूप में भी वसुधैव कुटुंबकम् का चयन किया। हम भारत के लोग विश्व मंगल की कामना की पूर्ति तभी अच्छे से कर सकते हैं जब पहले राष्ट्र मंगल की भावना से ओतप्रोत हों। यही भावना सबल, सक्षम और समरस राष्ट्र बनाएगी और विश्व में भारत का मान बढ़ाएगी।लाल किले से प्रधानमंत्री की ओर से किए जाने वाले संबोधन को लेकर एक उत्सुकता यह भी रहती है कि इस बार वह किस नए अभियान अथवा कार्य का श्रीगणेश करने वाले हैं। इस बार उन्होंने अगले माह से विश्वकर्मा योजना शुरू करने की घोषणा की। यह महत्वाकांक्षी योजना पारंपरिक कौशल वाले लोगों के उत्थान का माध्यम बनेगी।प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भ्रष्टाचार, परिवारवाद और तुष्टीकरण से लड़ने का जो संकल्प जताया, वह समय की मांग के अनुरूप है। इससे कोई इन्कार नहीं कर सकता कि भ्रष्टाचार, परिवारवाद और तुष्टीकरण सामाजिक न्याय के साथ-साथ देश की प्रगति में भी बाधक बना हुआ है। इन तीनों बुराइयों से डटकर लोहा लेने की बात कहकर उन्होंने एक तरह से आगामी आम चुनाव के अपने एजेंडे को भी स्पष्ट कर दिया।
Source: Dainik Jagran August 16, 2023 07:09 UTC