राज्य ब्यूरो, लखनऊ। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने कहा है कि कोई ऐसा कानून नहीं है जो बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 51 हजार करोड़ रुपये निकलने पर भी बिजली दरें बढ़ाने की अनुमति दे।मांग की है कि उपभोक्ताओं की बिजली कंपनियों पर निकल रहे 51 हजार करोड़ रुपये का हिसाब बिजली कंपनियां करें। पांच वर्षों तक राज्य में बिजली की दरें 10 प्रतिशत कम की जाएं।परिषद अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि विद्युत अधिनियम की धारा 108 के तहत बिजली कंपनियों को निर्देश दे कि वह उपभोक्ताओं के निकल रहे सरप्लस धनराशि का हिसाब बराबर करते हुए इसका लाभ उपभोक्ताओं को दें।
Source: Dainik Jagran February 08, 2026 08:20 UTC