राजपरिवारों की दूरदर्शिता: भविष्य की जरूरत का आकलन इतना सटीक, तभी तो 80-90 साल पहले बने ये अस्पताल आज भी उतने ही उपयोगी - News Summed Up

राजपरिवारों की दूरदर्शिता: भविष्य की जरूरत का आकलन इतना सटीक, तभी तो 80-90 साल पहले बने ये अस्पताल आज भी उतने ही उपयोगी


Hindi NewsLocalRajasthanJodhpurAssessment Of Future Needs Is So Accurate, Then Only This Hospital, Which Was Built 80 90 Years Ago, Is Still As Useful Today. Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐपराजपरिवारों की दूरदर्शिता: भविष्य की जरूरत का आकलन इतना सटीक, तभी तो 80-90 साल पहले बने ये अस्पताल आज भी उतने ही उपयोगीजाेधपुर 7 घंटे पहलेकॉपी लिंकजयपुर का 1936 में बना सवाई मानसिंह अस्पताल न केवल राजस्थान में बल्कि देशभर में मशहूर है।मदद व मेडिकल सुविधाएं मुहैया करवाने में तत्पर रहते थे महाराजा, 90 साल बाद आज भी काम आ रहे अस्पताल-डिस्पेंसरियांराजा और महाराजाओं ने भी पूरे राजस्थान में अस्पताल बनाने में कोई कमी नहीं रखी। जयपुर का सवाई मानसिंह अस्पताल हो या जोधपुर का उम्मेद और महात्मा गांधी अस्पताल, कोटा का एमबीएस अस्पताल हो या बीकानेर का पीबीएम अस्पताल, सब तत्कालीन राज परिवारों ने ही बनवाए थे। उनकी दूरदर्शिता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ये ही अस्पताल आज अपने-अपने शहरों के सबसे बड़े अस्पताल हैं। इनके निर्माण में भविष्य में विस्तार की संभावनाओं का भी पूरा ध्यान रखा गया है।बेड की क्षमता से लेकर नई मशीनरी के लिए भी पर्याप्त जगह की व्यवस्था रखी गई। 80-90 साल पहले बने ये अस्पताल आज भी वैसे ही उपयोगी साबित हो रहे हैं। राजपरिवारों ने तब शहरों के फैलाव को देख छोटी डिस्पेंसरियां भी बनवाई थी।जोधपुर : महात्मा गांधी अस्पताल और उम्मेद अस्पतालजोधपुर के तत्कालीन महाराजा जसवंतसिंह द्वितीय ने 1880 के दशक में तलहटी महल में शहर का पहला एलाेपैथी अस्पताल बनवाया। महाराजा उम्मेदसिंह ने 15 लाख 30 हजार रुपए से 1932 में विंडम अस्पताल बनवाया जो तत्कालीन वायसराय के नाम पर था। 1949 में इसका नाम महात्मा गांधी अस्पताल रखा गया। अस्पताल में करीब 500 बेड की क्षमता थीं। महाराजा उम्मेदसिंह ने प्रसूताओं व महिलाओं के लिए 1938 में उम्मेद जनाना अस्पताल बनवाया। 12.54 लाख रुपए में बने अस्पताल में 66 कॉटेज वार्ड के साथ ही 1 हजार बेड की क्षमता थी।जयपुर : 1936 में बना सवाई मानसिंह अस्पतालजयपुर का सवाईमानसिंह (एसएमएस) अस्पताल न केवल राज्य में बल्कि देशभर में मशहूर है। अस्पताल का नाम जयपुर के राजा सवाई मानसिंह द्वितिय के नाम पर रखा गया था। इसकी बिल्डिंग का निर्माण वर्ष 1934 में आरंभ होकर 1936 में पूरा हुआ। प्रारंभ में 200 मरीजों के बेड के साथ शुरू हुआ था। वर्तमान में यहां रेजिडेंट डॉक्टरों सहित करीब 1500 डॉक्टरों व 1800 नर्स का स्टाफ है व 4200 बेड हैं। यहां सभी रोगों के इलाज के लिए स्पेशलिटी और सुपर स्पेशियलिटी तक की व्यवस्था है। आउटडोर में 8-10 हजार मरीज रोजाना आते हैं।उदयपुर : 84 साल पहले बना महाराणा भूपाल अस्पताल57 एकड़ में फैले आरएनटी मेडिकल कॉलेज परिसर में ही स्थित है 1937 में बना महाराणा भूपाल (एमबी) राजकीय चिकित्सालय। 84 साल पहले एक-दो कमरों में शुरू हुआ यह अस्पताल, जिसे पहले ‘सामान्य चिकित्सालय’ और बाद में ‘सर वेलिंगडन चिकित्सालय’ के नाम से जाना गया। एमबी अस्पताल के अतिरिक्त अधीक्षक डॉ. रमेश जोशी बताते हैं कि अब 1500 बैड का यह चिकित्सालय संभाग का सबसे बड़ा अस्पताल है। संभाग सहित मध्यप्रदेश के नीमच-मंदसौर के प्रतिवर्ष 16 लाख मरीज यहां इलाज के लिए आ रहे हैं।कोटा : 1952 में बना महाराव भीमसिंह अस्पतालइस अस्पताल का निर्माण कराने के लिए महाराव भीमसिंह ने अपने पोलोग्राउंड की जमीन दी थी। वर्ष 1952 में इसका शिलान्यास किया और 1958 में महाराव भीमसिंह ने इसका उद्घाटन किया। पहले यह निदेशक चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवा, राजस्थान के नियंत्रण में कोटा का जिला अस्पताल था लेकिन अब 750 बेड की क्षमता वाला यह अस्पताल मेडिकल कॉलेज से जुड़ा मुख्य अस्पताल है। अस्पताल परिसर में स्थित अन्य सुविधाओं के निर्माण के साथ-केंद्रीय प्रयोगशाला, ब्लड बैंक, मैकेनिकल लांड्री, इनक्रींटर, मोर्चरी, सीटी स्कैन, पोस्टमार्टम सुविधा, नर्सिंग कॉलेज, नर्सिंग स्कूलआदि हैं।बीकानेर : 1937 में 14 लाख से बना पीबीएम अस्पतालबीकानेर पूर्व रियासत के महाराजा गंगा सिंह ने 11 मार्च, 1937 को पीबीएम अस्पताल बनवाया, जिसका उद्धाटन उदयपुर के महाराणा भोपाल सिंह ने किया था। तब लागत 14 लाख 14 हजार रुपए आई थी। इसमें कोटेज वार्ड सहित 137 बेड पुरुषों के और 107 महिलाओं के थे। संसाधनों और विशेषज्ञता के कारण यह पूरे उत्तर भारत में टॉप पर था। यहां जर्मन डॉक्टर इलाज करते थे। सर्जन, डेंटल, रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, फिजिशियन, ऐनेस्थिसिया व लैबोरेट्री सहित कई सुविधाएं थीं। आज यहां 1700 बेड क्षमता का अस्पताल है। क्षय रोग के उपचार के लिए 1936 में 64 बेड क्षमता का अलग अस्पताल बनाया।


Source: Dainik Bhaskar May 08, 2021 01:24 UTC



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