आषाढ़ मास की देवशयनी एकादशी को यानी इस वर्ष 20 जुलाई को सृष्टि का पालन करने वाले भगवान विष्णु योग निद्रा में जा चुके हैं। भगवान विष्णु के शयन में चले जाने के बाद शिवजी भी सोने जाएंगे। इस दिन को शिव शयनोत्सव के नाम से जाना जता है। इस बार शिव शयनोत्सव 23 जुलाई दिन शुक्रवार को है। भगवान शिव शयन काल में जाने से पहले अपने एक अन्य स्वरूप रुद्र को सृष्टि का कार्यभार सौंप देते हैं। रुद्र का शासन राष्ट्रपति शासन की तरह माना गया है, जिसमें नियमों का पूरी तरह पालन करना होता है। आपकी गलतियों पर रुद्र की पूरी नजर बनी रहती है, ऐसे में धर्म अध्यात्म के कार्य इस दौरान जल्दी फलदायी होते हैं।भगवान रुद्र संभालेंगे 4 महीने जगत का कामभगवान शिव के अवतार रुद्र सृष्टि के संचालन के साथ-साथ सृष्टि के भर्ता का भी दायित्व संभालते हैं। भगवान रुद्र की स्तुति ऋग्वेद में बलवान में अधिक बलवान कहकर की गई है। इसलिए इन दिनों रुद्रा की पूजा करना बहुत ही शुभ फलदायी माना गया है। भगवान रुद्र प्रसन्न भी बहुत जल्दी हो जाते हैं और क्रोध भी इनको जल्दी आता है। सृष्टि के संचालन के दौरान रुद्र जब किसी व्यक्ति के कर्मों से प्रसन्न होते हैं तब वह उसकी सभी समस्याओं को खत्म करते देते हैं और जिस पर क्रोध करते हैं, उसको जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।चतुर्मास में समय निकालकर भी यहां जरूर जाएं, पाएंगे पुण्य लाभइस समय को कहा गया है चातुर्मासदेवशयनी एकादशी से भगवान के शयन में चले जाने के बाद रुद्र के हाथों में सृष्टि के संचालन का दायित्व आ जाता है। कार्तिक मास की देवप्रबोधिनी एकादशी को भगवान विष्णु योग निद्रा से जगते हैं, तब फिर से सृष्टि के संचालन का कार्यभार भगवान विष्णु देखते हैं। जब भगवान चार महीनों के लिए योग निद्रा में होते हैं तो उस समय को चातुर्मास कहा गया है। इन दिनों कोई भी मांगलिक कार्यक्रम करना धार्मिक दृष्टि से निषेध बताया गया है क्योंकि सांसारिक कार्यक्रमों के आधार भगवान विष्णु माने जाते हैं। चातुर्मास का समय साधना, जप, तप व दान के लिए विशेष महत्वपूर्ण माना गया है। चातुर्मास के समय भगवान शिव का प्रिय मास सावन भी आता है, जिसमें एक माह तक भगवान शिव की पूजा का खास महत्व है।भगवान शिव का प्रिय मास सावनभगवान शिव के शयन में जाने के दो दिन बाद उनका प्रिय मास सावन आता है। सावन का महीना 25 जुलाई से शुरू हो रहा है और सावन का पहला सोमवार 26 जुलाई को है। सावन सोमवार का व्रत और पूजा करने से भगवान शिव भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। इस महीने शिव भक्त कांवड़ भी लेकर आते हैं लेकिन कोरोना संकट की वजह से कांवड़ यात्रा को स्थगित कर दिया है।अनोखा है उत्तराखंड का यह शिव मंदिर, पांडवों से हैं संबंधइस तरह बनता है चातुर्मासचातुर्मास के समय ब्रजधाम की यात्रा बहुत फलदायी की गई हैे। इस दौरान सभी तीर्थ ब्रज में ही रहते हैं और कृष्ण लीलाओं का आनंद प्राप्त करते हैं। चातुर्मास आषाढ़ मास के 5 दिन, सावन मास के 30 दिन, भाद्रपद की 30 दिन, आश्विन मास की 30 दिन और कार्तिक मास के 11 दिन मिलाकर चंद्रमास के हिसाब से 106 और सौर मास के हिसाब से 108 दिनों का चातुर्मास बनता है। चातुर्मास के समय जप, तप व दान का विशेष महत्व गया है। चातुर्मास में सावन मास, हरियाली तीज, रक्षा बंधन जैसे त्योहार मनाए जाते हैं।
Source: Navbharat Times July 21, 2021 10:30 UTC