शिव जल्दी और सहज वरदान देने वाले देव - News Summed Up

शिव जल्दी और सहज वरदान देने वाले देव


रांची (ब्यूरो) । प्रजापिता ब्रह्माकुमारी और आरआर स्पोर्टिंग क्लब के तत्वावधान में सांई मंदिर (आरआर स्पोर्टिंग क्लब दुर्गा पूजा स्थान) रातू रोड में द्वादश ज्योर्तिलिंगम आध्यात्मिक दर्शन 16 दिवसीय मेला का आयोजन किया गया है। इस अवसर पर दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए डा। प्ररीप कुमार गुप्ता, प्रोफेसर,गॉसनर कॉलेज ने कहा एक ही यात्रा से 12 तीर्थयात्राओं के पुण्यफल की सहज प्राप्ति करने के लिए श्रावण के पावन महीने में दूर्गा मंदिर(आरआर स्पोर्टिंग क्लब) रातू रोड के इस अध्यात्मिक मेले में अवश्य आना चाहिए।पापकटेश्वर कहा जाता हैउन्होंने कहा की शिव को मुक्तेश्वर और पापकटेश्वर कहा जाता है। शिव आशुतोष हैं। शिव परमात्मा जल्दी और सहज ही उच्च वरदान देने वाले हैं। इसी भावना को लेकर शिव पर जल चढ़ाते हैं और उनकी पूजा करते हैं। परंतु जीवन भर रोज शिव की पूजा करते रहने पर तथा हर वर्ष श्रद्धापूर्वक शिवरात्रि पर जागरण, व्रत इत्यादि करने पर भी मनुष्य के पाप और संताप क्यों नहीं मिटते, उसे मुक्ति और शक्ति क्यों नहीं प्राप्त होती और उसे राज्य भाग्य का अमर वरदान नहीं मिलता। आखिर शिव को प्रसन्न करने की सहज विधि क्या है। इसके लिए हमें अपने मनोविकारों को दूर करने की आवश्यकता है। विकारों को दग्ध करने में राजयोग का अभ्यास हमारी सहायता करता है।सोम पिलाते हैंसुमन सिहं, पुर्व अध्यक्ष, इनर व्हल क्लब, रांची ने कहा की श्रावण के महीने में विशेष रूप से सोमवार को शिव की पूजा की जाती है। इसके पीछे का रहस्य यह है कि कलियुग के अंत में जब सभी नगुष्यात्माएंं घोर अज्ञान में फंस कर दुखी हो जाती हैं तब परमात्मा धरती पर अवतरित हो ज्ञान रूपी सोम पिलाते हैं अर्थात ज्ञान की वर्षा करते है। ज्योर्तिलिंगम के रूप में सोमनाथ, ऊंकारेश्वर मल्लिकार्जुन वैद्यनाथ, महाकालेश्वर भीमेश्वर, भुवनेश्वर केदारनाथ त्रयम्बकेश्वर, विश्वनाथ रामेश्वर एवं नागेश्वर परमात्मा शिव के सभी नाम कत्र्तव्यवाचक हैं। ऐसा समय कलियुग का अंतिम चरण ही था जब लोग धर्म-भ्रष्ट और कर्म भ्रष्ट और योग भ्रष्ट हो जाते हैं और पशुओं के समान तुच्छ वुद्धि बन जाते हैं तब कलियुग के अंत में परमपिता परमात्मा शिव संसार का कल्याण करते हैं और सभी के दुखों को हर कर उन्हें सुख प्रदान करते हैं। जिसके बाद सुख का युग सतयुग शुरू हुआ।हलाहल पान कियाकेन्द्र संचालिका ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा कि शिव पर तो आक धतूरा ही चढ़ाया जाता है। संकटमोचन महाकालेश्वर परमात्मा शिव ने मानवता के कल्याणार्थ हलाहल पान किया था। आज वे पुन: सृष्टि पर विकारों का विषपान कर रहे हैं। अत: आप भी जीवन में दुख अशांति पैदा करने वाले काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार रूपी हलाहल विष को पतित पावन परमात्मा शिव को भेंट चढ़ा दें और स्वयं पावन बन मानव मात्र को पावन निर्विकारी बनाने का पान का बीड़ा उठाएं।


Source: Dainik Jagran July 17, 2023 16:42 UTC



Loading...
Loading...
  

Loading...

                           
/* -------------------------- overlay advertisemnt -------------------------- */