जानिए 4 बड़े कारण 1. अमेरिका-ईरान युद्ध से बढ़ा वैश्विक तनाव अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव बाजार के लिए सबसे बड़ा जोखिम बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर उसने होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला तो उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला किया जाएगा। जवाब में ईरान ने भी इसे पूरी तरह बंद करने की धमकी दी है। इस टकराव से वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा बाजार पर खतरा बढ़ गया है, जिससे निवेशकों की घबराहट बढ़ी है।2. रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर भारतीय रुपया लगातार दबाव में है और सोमवार को यह 93.89 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के लिए भारत में निवेश को कम आकर्षक बनाता है। इससे पूंजी निकासी बढ़ती है और बाजार पर दबाव आता है। साथ ही, आयात महंगा होने से महंगाई भी बढ़ने का खतरा रहता है।3. कच्चे तेल की कीमतें बनी सबसे बड़ी चिंता ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है, जो भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए बड़ी चिंता है। ऊंचे तेल दाम से महंगाई बढ़ती है। चालू खाता घाटा बढ़ता है और कंपनियों का मुनाफा घटता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर तेल लंबे समय तक महंगा रहा तो भारत की GDP ग्रोथ पर भी असर पड़ सकता है।4. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने बाजार में भारी बिकवाली की है। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक विदेशी निवेशक करीब 1 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेच चुके हैं। सिर्फ मार्च महीने में ही 86,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी हो चुकी है। लगातार बिकवाली से बाजार में कमजोरी और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में अनिश्चितता और वोलैटिलिटी बनी रहेगी।
Source: NDTV March 23, 2026 06:09 UTC