प्रयागराज में जस्टिस अरुण कुमार देशवाल की सिंगल बेंच ने साफ शब्दों में कहा कि पुलिस कानून से ऊपर नहीं है और अपराधी को सजा देना न्यायपालिका का काम है, न कि पुलिस का. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी के शरीर के किसी गैर-जरूरी हिस्से पर गोली मारना भी कानूनन अस्वीकार्य है. अदालत ने टिप्पणी की कि यह प्रथा अब नियमित होती जा रही है, जो या तो वरिष्ठ अधिकारियों को खुश करने या आरोपी को तथाकथित सबक सिखाने के उद्देश्य से की जाती है. राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि मुठभेड़ के संबंध में एफआईआर दर्ज की गई थी, लेकिन घायल का बयान न तो मजिस्ट्रेट के सामने और न ही किसी चिकित्सा अधिकारी द्वारा दर्ज किया गया. हाईकोर्ट ने इसे सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन मानते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी आपत्ति जताई.
Source: NDTV January 31, 2026 11:17 UTC