सावन में जाप करने वालों के होते हैं खाते मैंटेन: भक्ति का रखा जाता है हिसाब-किताब, ज्यादा जाप करने वाले को मिलता है पुरस्कार - News Summed Up

सावन में जाप करने वालों के होते हैं खाते मैंटेन: भक्ति का रखा जाता है हिसाब-किताब, ज्यादा जाप करने वाले को मिलता है पुरस्कार


Hindi NewsLocalRajasthanSriganganagarThe Account Of Devotion Is Kept, The One Who Chants More Gets The Rewardसावन में जाप करने वालों के होते हैं खाते मैंटेन: भक्ति का रखा जाता है हिसाब-किताब, ज्यादा जाप करने वाले को मिलता है पुरस्कारश्रीगंगानगर 20 घंटे पहलेकॉपी लिंकश्रीगंगानगर का श्री रामेश्वरम सेवा समिति शिव मंदिर।​​​​ आम तौर पर लेजर मैंटेन करने का काम बैंकों या फाइनेंस कंपनियों में होता है, लेकिन श्रीगंगानगर में एक ऐसा मंदिर है जहां सावन के महीने में ओम नम: शिवाय का जाप करने वालों का भी हिसाब किताब रखा जाता है। जी हां, यह मंदिर है शहर के अग्रसेन नगर स्थित श्री रामेश्वर सेवा समिति शिवमंदिर।इस मंदिर में प्रति वर्ष सावन के महीनें में करोड़ो ओम नम: शिवाय जाप होते है। इस दौरान मंदिर पूरा दिन खुला रहता है। जो भी श्रद्धालु जाप करने के लिए यहां आता है, उसके जाप करके निकलते समय उस दिन के जाप की संख्या रजिस्टर में दर्ज कर ली जाती है। मंदिर के कार्यक्रम संयोजक खुद एक चार्टर्ड एकाउंटेंट ऐसे में आसानी से ये एकाउंट मेंटेंन हो पाते हैं।अब तक हुए करोड़ों जापमंदिर में जाप की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई। मंदिर समिति पदाधिकारी बताते हैं यह शुरुआत करते समय सोचा नहीं था कि इतनी बड़ी संख्या में जाप यहां हो पाएंगे। शुरू में इक्कीस लाख जाप का लक्ष्य रखा गया है लेकिन यह संख्या सत्ताईस लाख तक पहुंच गई। वर्ष 2008 में 51 लाख जाप का लक्ष्य रखा गया और इसके मुकाबले 58 लाख 13 हजार जाप किए गए। इसी प्रकार वर्ष 2009 में सवा करोड़ जाप का लक्ष्य रखा गया तथा इसकी एवज में एक करोड़ ग्यारह लाख 95 हजार जाप हुए। इसी क्रम में यह संख्या बढ़ती चली गई। वर्ष 2019 में दो करोड़ इक्यावन लाख जाप का लक्ष्य रखा गया तथा इसकी एवज में पांच करोड़ से ज्यादा जाप हुए।हर श्रद्धालु का बनता है खातामंदिर के कार्यक्रम संयोेजक सीए पवन मित्तल बताते हैं कि हमने शुरुआत से ही तय किया कि जितने जाप करेंगे उसका हिसाब रखेंगे। उसके लिए रजिस्टर मैंटेन कर उसमें श्रद्धालुओं के किए जाप की संख्या लिखी जाती। खुद फाइनेंशियल कामकाज से जुडा होने के कारण हर दिन श्रद्धालुओं का हिसाब किताब रखने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई।सबसे ज्यादा जाप पर मिलता है पुरस्कारमित्तल बताते हैं कि मंदिर में जाप पूर्ण होने के बाद एक आयोजन रखा जाता है। इसमें सबसे ज्यादा जाप करने वाले श्रद्धालुओं का सम्मान किया जाता है। इसके पीछे उद्देश्य सभी को शिव नाम जाप के लिए प्रेरित करना होता है।सावन पच्चीस से, होगा जाप का आयोजनसावन की शुुरुआत इस बार पच्चीस जुलाई से यानी तीन दिन बाद होनी है। ऐसे में इस बार भी आयोजन की तैयारी की जा रही है। मित्तल बताते हैं कि पिछले वर्ष तो कोरोना के चलते आयोजन नहीं हुआ था लेकिन इस बार इसकी तैयारी की जा रही है। वे बताते हैं कि कोराेना नियमों की पालना करते हुए यह आयोजन किया जाएगा। हो सकता है इस बार जाप करोड़ों में न हो लेकिन कोशिश की जाएगी की इस बार भी परम्परा का निर्वहन किया जा सके।


Source: Dainik Bhaskar July 22, 2021 09:11 UTC



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