Hindi NewsLocalBiharPatnaBihar sharifAfter The Death Of The Teenager Due To Diarrhea, The Stretcher Was Not Found, Then The Father Took The Body In His Lapस्वास्थ्य सेवा बेपटरी: डायरिया से किशोरी की मौत के बाद नहीं मिला स्ट्रेचर तो पिता गोद में उठा ले गए लाशबिहारशरीफ 8 घंटे पहलेकॉपी लिंकबेटी की लाश गोद में उठाए बुजुर्ग पिता।डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही का आरोप, हालत बिगड़ने पर खेला रेफर का खेलसदर अस्पताल में इन दिनों नाम बड़े, दर्शन छोटे वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। रविवार को डायरिया से पीड़ित किशोरी की मौत के बाद, स्ट्रेचर नहीं मिलने पर पिता बेटी की लाश को गोद में उठाकर बाहर लाएं। परिवार ने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया।हालत बिगड़ने पर डॉक्टर ने रेफर का खेल खेला। यही नहीं, सरकारी एंबुलेंस उपलब्ध कराने में भी आनाकानी की गई। निजी एंबुलेंस को भुगतान करने के लिए पिता के पास रुपए नहीं थे। मीडिया कर्मियों के पहुंचने पर अस्पताल प्रबंधक ने आनन-फानन में एंबुलेंस उपलब्ध कराया। इसके बाद परिवार बेटी की लाश ले गया।एक नजर घटना पर सोहसराय थाना क्षेत्र के आशा नगर निवासी अशोक पासवान की 15 वर्षीया पुत्री डायरिया से पीड़ित थी। परिवार उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया। ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने किशोरी का इलाज किया। घंटे भर बाद सुधरने के बजाय बच्ची की हालत बिगड़ गई। इसके बाद चिकित्सक ने हायर सेंटर रेफर कर दिया। जिसके कुछ देर बाद किशोरी की मौत हो गई।सरकारी एंबुलेंस देने में आनाकानी, निजी एंबुलेंस के लिए नहीं थे रुपएआंसू बहाते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था को कोसाबेटी की मौत के बाद पिता इमरजेंसी वार्ड में आंसू बहाते हुए सदर अस्पताल की व्यवस्था को कोस रहे थे। पिता ने डॉक्टर पर इलाज में घोर लापरवाही का आरोप लगाया। कहा कि डॉक्टर को डायरिया रोग के इलाज का नॉलेज नहीं था। स्लाइन और इंजेक्शन लगाने के बाद बच्ची की हालत बिगड़ गई तो रेफर कर पल्ला झाड़ लिया। शव उठाने के लिए स्ट्रेचर नहीं मिला। सरकारी एंबुलेंस भी नहीं दिया जा रहा था। निजी एंबुलेंस चालक मोटी रकम मांग रहा था।गोद में उठाया बेटी का शवकिशोरी की मौत के बाद शव उठाने के लिए परिवार को स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं कराया गया। जिसके बाद पिता बेटी की लाश को गोद में उठाकर बाहर आएं। सरकारी एंबुलेंस देने में भी टालमटोल हो रहा था। गरीब के पास निजी एंबुलेंस को देने के लिए रुपए नहीं थे। मीडिया कर्मियों के पहुंचने पर आनन-फानन में प्रबंधन ने सरकारी एंबुलेंस उपलब्ध कराया।आए दिन सामने आती है कुव्यवस्था, सुधार नहींसदर अस्पताल की कुव्यवस्था आए दिन सामने आती है। जिसमें किसी तरह का सुधार होता नहीं दिख रहा। मरीज की हालत बिगड़ने पर रेफर का खेल तो सालों पुराना है। अस्पताल परिसर दलालों का अड्डा बना रहता है। प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को दलाल बहलाकर निजी क्लिनिक ले जाते हैं।सरकारी एंबुलेंस और स्ट्रेचर के अभाव में शव को गोद में उठाए जाने का भी यह पहला मामला नहीं है। इसके पूर्व भी कई परिजन शव को कंधे या गोद में उठाकर ले गए हैं। दवा वितरण में भी डंडीमारी होती है। जबकि, हर साल लाखों की दवा एक्सपायर कर जाती है। ऐसा भी नहीं कि कुव्यवस्था से स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारी वाकिफ नहीं है। इसके बाद भी सदर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार नहीं हो पाता है।प्रबंधन ने झाड़ा पल्लाडीएस डॉ. सुजीत कुमार अकेला ने बताया कि स्ट्रेचर मैन की कमी है। इसके लिए वरीय अधिकारियों को लिखा जाएगा। किशोरी की मौत में लापरवाही नहीं हुई। बेहतर इलाज किया गया। अस्पताल की व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा। ड्यूटी पर तैनात डॉ. महेंद्र कुमार ने बताया कि बच्ची की हालत खराब थी। उसे रेफर किया गया था। परिजन मरीज को ले जाने में टाल मटोल कर रहे थे। जिससे उसकी मौत हुई।
Source: Dainik Bhaskar July 05, 2021 00:21 UTC