ਹਰੇਕ ਜੀਵ ਦੇ) ਅੰਦਰ ਤੇ ਬਾਹਰ ਸਿਰਫ਼ ਤੂੰ ਹੀ ਵੱਸਦਾ ਹੈਂ, ਤੂੰ ਆਪ ਹੀ ਜੀਵ ਨੂੰ ਸਮਝ ਬਖ਼ਸ਼ਦਾ ਹੈਂ। (ਹੇ ਪ੍ਰਭੂ!) परमात्मा के नाम के बिना हरेक जीव गलत रास्ते पर पड़ा हुआ है, माया के मोह के कारण सही जीवन राह से टूटा हुआ है।2। हे भाई! परमात्मा जो बुद्धि (मनुष्य को) देता है (उसके अंदर) वही मति प्रकट होती है। (प्रभू की दी हुई मति के बिना) और कोई मति (मनुष्य ग्रहण) नहीं (कर सकता)। हे प्रभू! (हरेक जीव के) अंदर और बाहर सिर्फ तू ही तू बसता है, तू खुद ही जीव को समझ बख्शता है। (हे प्रभू!) जिस मनुष्य को सतिगुरू वडिआई देता है वह अपने हृदय में ही प्रभू की हजूरी हासिल कर लेता है। हे नानक!
Source: Dainik Jagran October 24, 2023 14:17 UTC