Bhandara News चिखला मैंगनीज माइन परिसर से हरे-भरे सागौन के पेड़ काटे जाने का मामला सामने आया है। इलाके में 50 से 55 कीमती सागौन के पेड़ काट दिए गए। इससे प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। वन विभाग ने मामले का पंचनामा कर तहसीलदार को रिपोर्ट सौंपी है। बता दें कि, जहां लोगों की आवाजाही होती हैं ऐसे जगह से सागौन के पेड़ काटे गए। यह जमीन गुट क्रमांक 669 अंतर्गत राजस्व विभाग के अधिकार में आती है। इस जमीन को चिखला खदान प्रशासन को किराये पर दिया गया है। यह गैर-कानूनी कटाई चिखला बस्ती की मेन रोड के पास हुई।दिन-रात लोगों का आना-जाना लगा रहता है, फिर भी इतने बड़े पैमाने पर सागौन की कटाई होती रही। नाकाडोंगरी इलाके के अधिकारियों और कर्मियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। यहां काटे गए सागौन के पेड़ दो से ढाई फीट के घेरे वाले थे। कुछ वर्ष पुराने कीमती थे। इस तरह पेड़ों की कटाई कुछ घंटों में होने वाला काम नहीं है। इसके लिए बहुत समय और मशीनों का शोर होता है। इस पूरे मामले में गोबरवाही इलाके में प्रशासन की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। पूरा इलाका सातपुड़ा के जंगल से सटा हुआ है।पंचनामा कर रिपोर्ट सौंपी है : "चिखला खान इलाके में काटे गए सागौन के पेड़ों का पंचनामा किया गया है और इसकी रिपोर्ट तुमसर के तहसीलदार को सौंप दी गई है। वन विभाग ने मामले की जांच और तलाशी के लिए दो अलग-अलग टीमें बनाई हैं। - सचिन रामटेके, वन परिक्षेत्र अधिकारी, नाकाडोंगरी
Source: Dainik Bhaskar January 30, 2026 15:53 UTC