नई दिल्ली(इंटरनेट डेस्क): बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के चीफ तारिक रहमान 25 दिसंबर 2025 को 17 साल बाद लंदन से वापस लौटे और दो महीने के भीतर ही वो बांग्लादेश के पीएम बनने जा रहे हैं। तारिक अब सिर्फ बांग्लादेश में लंबे समय तक शासन करने वाले परिवार के उत्तराधिकारी भर नहीं हैं, उन्होंने खुद को मौजूदा वक्त में यहां का सबसे शक्तिशाली नेता भी साबित कर दिया है। जिस बांग्लादेश से उन्हें 17 साल तक निर्वासित रहना पड़ा, अब वहां का शासन उनके हाथों में होगा।4 साल की उम्र में हिरासततारिक रहमान की पहली पहचान यही है कि वो जियाउर रहमान और बांग्लादेश की पहली लेडी पीएम खालिदा जिया के बेटे हैं। उनका जन्म 1967 में उस समय हुआ था, जब बांग्लादेश पूर्वी पाकिस्तान कहलाता था। यानी तब वो मौजूदा पाकिस्तान का ही हिस्सा था। 1971 के मुक्ति संग्राम (बांग्लादेश की आजादी की जंग) के दौरान तारिक महज चार साल के थे और उन्हें कुछ समय के लिए हिरासत में भी रखा गया था। इसी वजह से उनकी पार्टी बीएनपी उन्हें “युद्ध के सबसे कम उम्र के बंदियों में शामिल” बताकर सम्मानित करती है।2007 में गिरफ्तारी2007 में उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। उस दौरान उन्होंने जेल में शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था। रिपोर्टों के मुताबिक, उनकी रिहाई राजनीति से दूर रहने की शर्त पर हुई थी। उसी वर्ष रिहा होने के बाद वे इलाज के लिए 2008 में लंदन चले गए और 17 साल उन्हें बांग्लादेश से बाहर लंदन में रहना पड़ा।2008 में आजीवन कारावास2008 में शेख हसीना के सत्ता में लौटने के बाद बड़ी संख्या में बीएनपी नेताओं और कार्यकर्ताओं को जेल भेजा गया। बाद में, 2018 में, 2004 में हसीना की रैली पर हुए हमले की साजिश के मामले में तारिक रहमान को उनकी अनुपस्थिति में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। लेकिन शेख हसीना के सत्ता से हटने और मां की तबीयत खराब होने के बाद उन्होंने एक बार फिर बांग्लादेश की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी। मां खालिदा की मौत के बाद उन्हें BNP चीफ बनाया गया और इस भूमिका में उन्होंने अपने पहले ही चुनाव में प्रचंड जीत हासिल कर ली है।
Source: Dainik Jagran February 13, 2026 21:38 UTC