84 साल के एक्टिविस्ट की मौत: भीमा कोरेगांव केस में 8 महीने पहले जेल भेजे गए स्टेन स्वामी का अस्पताल में निधन, कोर्ट को बता चुके थे मौत का डर - News Summed Up

84 साल के एक्टिविस्ट की मौत: भीमा कोरेगांव केस में 8 महीने पहले जेल भेजे गए स्टेन स्वामी का अस्पताल में निधन, कोर्ट को बता चुके थे मौत का डर


Hindi NewsLocalMaharashtraStan Swamy Death News | Bhima Koregaon Accused Father Stan Swamy Passes Away In Mumbai84 साल के एक्टिविस्ट की मौत: भीमा कोरेगांव केस में 8 महीने पहले जेल भेजे गए स्टेन स्वामी का अस्पताल में निधन, कोर्ट को बता चुके थे मौत का डरमुंबई एक घंटा पहले लेखक: आशीष राय/संध्या द्विवेदीकॉपी लिंकभीमा कोरेगांव हिंसा केस में 8 महीने पहले मुंबई की तलोजा जेल भेजे गए एक्टिविस्ट फादर स्टेन स्वामी (84) का सोमवार को अस्पताल में निधन हो गया। वे लगातार गिरती सेहत का हवाला देकर जमानत की अपील कर रहे थे। उनके वकील ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि रविवार को तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। जहां उनकी हालत बिगड़ती गई। स्टेन के निधन पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दुख जताया है। उन्होंने ट्वीट किया, 'फादर स्टेन स्वामी के निधन पर हार्दिक संवेदना। वह न्याय और मानवता के पात्र थे।'भीमा कोरेगांव हिंसा केस में नेशनल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी (NIA) ने आरोप लगाए थे कि स्टेन के नक्सलियों से लिंक हैं और खासतौर पर वे प्रतिबंधित माओवादी संगठन के संपर्क में हैं। वे अक्टूबर 2020 से मुंबई की तलोजा जेल में बंद थे और लगातार उनकी तबीयत बिगड़ती जा रही थी। उन्हें 8 अक्टूबर को अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया था।हाईकोर्ट से स्टेन ने कहा था- जेल में स्वास्थ्य सुविधाएं खराबस्टेन को मुंबई की तलोजा जेल भेजा गया था। यहां उन्होंने खराब स्वास्थ्य सुविधाओं की शिकायत की थी। तबीयत ज्यादा बिगड़ने के बाद 28 मई को मुंबई हाईकोर्ट उन्हें अस्पताल भेजने का आदेश दिया था। होली फैमिली अस्पताल में उनका इलाज किया जा रहा था। शनिवार को स्टेन के वकील ने हाईकोर्ट को बताया था कि उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही है।इससे पहले मई में स्टेन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान अदालत से कहा था कि जेल में उनकी सेहत लगातार गिरती जा रही है। उन्होंने अंतरिम बेल की अपील करते हुए कहा था कि यही स्थिति लगातार जारी रही तो जल्द मेरी मौत हो जाएगी। स्टेन के अलावा उनके उनके दूसरे साथियों ने भी कहा था कि जेल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं। उन्होंने कहा था कि जेल अधिकारी लगातार स्वास्थ्य सुविधाओं, टेस्ट, सफाई और सोशल डिस्टेंसिंग जैसी चीजों को नजरअंदाज कर रहे हैं।NIA ने किया था स्टेन की जमानत का विरोधपिछले महीने NIA ने स्टेन स्वामी को जमानत दिए जाने का विरोध किया था। जांच एजेंसी ने कहा था कि उनकी तबीयत खराब होने का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है। वो एक माओवादी हैं और उन्होंने देश में अस्थिरता लाने के लिए साजिश रची है। 31 दिसंबर 2017 को पुणे के नजदीक भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। इस हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। NIA ने कहा था कि इस हिंसा से पहले एलगार परिषद की सभा हुई थी। इस दौरान स्टेन ने भड़काऊ भाषण दिया था। इसी से हिंसा भड़की।पार्किंसन बीमारी से जूझ रहे थे स्टेन स्वामीस्‍वामी की तबीयत जब बहुत ज्‍यादा बिगड़ गई तो हाई कोर्ट के आदेश के बाद उन्‍हें अस्‍पताल में भर्ती कराया गया। स्‍टेन स्‍वामी सुनने की क्षमता पूरी तरह खो चुके थे। वह लाइलाज पार्किंसन बीमारी से भी जूझ रहे थे। उन्‍हें स्‍पांडलाइटिस की समस्‍या थी। पिछले साल मई में वह कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे।5 दशक तक आदिवासियों के लिए काम कियाआदिवासी अधिकारों के लिए लड़ने वाले स्टेन ने करीब 5 दशक तक झारखंड में काम किया था। उन्होंने विस्थापन, भूमि अधिग्रहण जैसे मुद्दों को लेकर संघर्ष किया। उन्होंने दावा किया था कि नक्सलियों के नाम पर 3000 लोगों को जेल भेजा गया। इनका केस अभी पेंडिंग है। स्टेन इनके लिए हाईकोर्ट में लड़ाई लड़ रहे थे।1 जनवरी, 2018 को भीमा-कोरेगांव लड़ाई की 200 वीं वर्षगांठ मनाने के दौरान हिंसा भड़क गई थी।'दफन तो UAPA को होना था लेकिन, स्वामी हो गए'बस्तर में आदिवासियों के हक के लिए लड़ रहीं ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट और रिसर्चर बेला भाटिया ने कहा कि वे रिहा हो गए, उनकी जिंदगी से ! जेल से रिहा होकर अपनी कर्मभूमि झारखंड जाने की इच्छा अधूरी ही रह गई। दफन तो UAPA जैसे कानून को होना चाहिए था, पर इस कानून की वजह से आजादी की राह तकते-तकते स्वामी की जान चली गई।वे सवाल उठाती हैं, स्टेन स्वामी एक राजनीतिक बंदी थे। अंडर ट्रायल प्रिजनर थे। उनके ऊपर महज आरोप था। यह साबित नहीं हुआ था। उनके साथ किसी आतंकवादी की तरह बर्ताव किया जा रहा था। उन्हें जरूरत की छोटी से छोटी चीजें भी नहीं मिल रहीं थीं।'बस्तर में 300 से ज्यादा लोग UAPA के तहत बंदी'बेला कहती हैं कि बस्तर के भीतर भी तकरीबन 300 से ज्यादा आदिवासियों को UAPA के तहत कई साल से बंदी बना रखा गया है। उनसे न पूछताछ होती है और न उनकी रिहाई होती है। उनके लिए मानवाधिकार कार्यकर्ता लड़ रहे हैं। यह एक्ट ऐसा जाल है, जिसमें एक बार फंसने के बाद निकलना मुश्किल है।दिल्ली दंगों में आरोपी बनाकर इसी मामले में 3 स्टूडेंट्स की पिछले साल हुई गिरफ्तारी के बाद हाल ही में हुई रिहाई दुर्लभ मामला है। वरना जो इस एक्ट के तहत जेल गया, उसकी रिहाई के चांस बहुत कम होते हैं।'बिना कारण बताए NIA ने गिरफ्तार किया'स्टेन स्वामी के दोस्त जेवियर दास के मुताबिक, 8 अक्टूबर, 2020 को NIA के कुछ लोग रांची में स्टेन स्वामी के घर आए। उन्होंने स्वामी का मोबाइल कब्जे में लेकर उन्हें कुछ मिनट के भीतर अपना बैग तैयार करने को कहा। 83 साल के स्टेन स्वामी को कुछ नहीं बताया गया। गाड़ी से उन्हें एयरपोर्ट ले गए और फिर फ्लाइट से मुंबई। वहां 23 अक्टूबर तक वे ज्यूडिशियल कस्टडी में रहे। उसके बाद उन्हें तलोजा जेल में डाल दिया गया। वे भारत में आतंकवाद का आरोप झेलने वाले सबसे बुजुर्ग शख्स थे।क्या है भीमा कोरेगांव मामला? महाराष्ट्र के पुणे में भीमा कोरेगांव में 2018 में हुई हिंसा के सिलसिले में कई वामपंथी कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों को गिरफ्तार किया गया है। भीमा कोर


Source: Dainik Bhaskar July 05, 2021 10:11 UTC



Loading...
Loading...
  

Loading...

                           
/* -------------------------- overlay advertisemnt -------------------------- */