डिजिटल डेस्क,भोपाल। मप्र पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग प्रदेश के नौ जिलों, झाबुआ, जबलपुर, देवास, इंदौर, उज्जैन, भोपाल, ग्वालियर, सीहोर एवं बैतूल में अण्डे एवं मांस के लिए बैकयार्ड मुर्गीपालन क्लस्टर बनायेगा। इसके लिए विभाग की अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी ने निर्देश जारी कर दिए।बैकयार्ड मुर्गीपालन, घर के पीछे, आंगन या खाली जगह में कम संख्या (10-50) में देशी या उन्नत नस्ल की मुर्गियों को पालने की एक पारंपरिक विधि है। यह एक बहुत कम लागत वाला व्यवसाय है, जिसमें मुर्गियां घर का बचा हुआ खाना, अनाज और कीड़े-मकोड़े खाकर पलती हैं, जो ग्रामीण आजीविका, प्रोटीन (अंडे/मांस) और अतिरिक्त आय का एक बेहतरीन साधन है। इसमें सरकारी अनुदान भी मिलता है।इसी प्रकार, विभाग प्रदेश में जंगली मधुमक्खी शहद क्लस्टर छह जिलों यथा छिन्दवाड़ा, बालाघाट, अनूपपुर, डिण्डौरी एवं मण्डला में और मशरुम क्लस्टर छह जिलों यथा बालाघाट, नर्मदापुरम, जबलपुर, सीहोर, मंडला एवं ग्वालियर में भी बना रहा है जिसके लिये अपर मुख्य सचिव ने कहा है कि क्लस्टर हेतु लक्ष्य अनुसार प्रशिक्षण, उत्पादक समूहों के गठन एवं शीड कैपिटल आदि की प्रगति की समीक्षा कर लक्ष्य पूर्ति की जाये तथा क्लस्टर हेतु शेयर होल्डर की संख्या बढ़ाने का प्रयास करें।
Source: Dainik Bhaskar February 23, 2026 13:04 UTC