Bihar Politics: हरिवंश फिर बने राज्यसभा सांसद, बिहार में भाजपा की नई राजनीतिक चाल - News Summed Up

Bihar Politics: हरिवंश फिर बने राज्यसभा सांसद, बिहार में भाजपा की नई राजनीतिक चाल


अरुण अशेष, पटना। हरिवंश की राज्यसभा सदस्यता बरकरार रख कर भाजपा ने संदेश दिया है कि अब वह सभी व्यवहारिक मामले में राज्य की राजनीति में बड़े भाई की भूमिका निभा रही है। चौंकाने वाले निर्णय के लिए भाजपा मशहूर रही है। इस निर्णय को भी इसी श्रेणी में रखा जा सकता है।जदयू ने हरिवंश को राज्यसभा में तीसरी बार न भेजने का कोई कारण नहीं बताया था। उदाहरण जदयू की उस परिपाटी का दिया जा रहा था, जिसमें किसी को राज्यसभा में लगातार तीसरी बार नहीं भेजा गया, लेकिन यह परिपाटी रामनाथ ठाकुर के मामले में ही आगे नहीं बढ़ पाई, क्योंकि उन्हें इसी साल तीसरी बार राज्यसभा में भेजा गया।यह महज संयोग नहीं भाजपा की परिपाटी को करीब से समझने वाले लोग अनुमान लगा रहे थे कि गाढ़े समय में काम आने वाले हरिवंश को कोई न कोई पद जरूर मिलेगा, लेकिन किसी को यह अंदाजा नहीं था कि हरिवंश उसी दिन राज्यसभा के लिए नामित किए जाएंगे, जिस दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस सदन की सदस्यता ग्रहण करेंगे।भाजपा का राजनीतिक निर्णय समय को ध्यान में रख कर किया जाता है। यह इसी मान्यता का उदाहरण है। यह महज संयोग नहीं है। हरिवंश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हैं, मगर उनकी कर्मभूमि बिहार ही रही है। वे अविभाजित बिहार में रांची आए थे।राज्य विभाजन के बाद बिहार और झारंखंड में समान रूप से उनकी सक्रियता बनी रही। राज्य की जाति आधारित राजनीति में हरिवंश को अचानक स्वजातीय राजपूतों की सहानुभूति मिलने लगी। बिहार से राज्यसभा में कुल 16 सदस्य होते हैं। 2024 के बाद हरिवंश बिहार से राजपूत जाति के इकलौते राज्यसभा सदस्य थे। उनके न जाने के कारण बिहार से राज्यसभा में राजपूत प्रतिनिधित्व विहीन हो गए। राज्यसभा चुनाव के समय इस पर बड़ी प्रतिक्रिया हुई। आक्रोश में यह विमर्श भी शुरू हो गया कि क्यों नहीं किसी राजपूत उम्मीदवार को स्वतंत्र ढंग से चुनाव लड़ा दिया जाए।यह महत्वपूर्ण है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में किसी अकेली जाति में सबसे अधिक राजपूत उम्मीदवार ही चुनाव जीत कर आए। 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में राजपूत विधायकों की संख्या 34 है। इनमें 33 केवल एनडीए के हैं। हरिवंश के नामित करने के निर्णय के बाद इंटरनेट मीडिया पर इस बिरादरी के लोग भाजपा की प्रशंसा कर रहे हैं। हालांकि हरिवंश अब भी राज्यसभा में बिहार का प्रतिनिधित्व नहीं करेंगे।क्यों जरूरी हैं? हरिवंश 2014 में जदयू की ओर से राज्यसभा भेजे गए। उस समय जदयू महागठबंधन का हिस्सा था। 2015 में राज्य में महागठबंधन की सरकार बनी। 2016 में नोटबंदी की घोषणा हुई। जदयू इसका विरोध कर रहा था। उस समय हरिवंश ने लिखा कि नोटबंदी क्यों जरूरी है।


Source: Dainik Jagran April 10, 2026 14:07 UTC



Loading...
Loading...
  

Loading...

                           
/* -------------------------- overlay advertisemnt -------------------------- */