इस समय 45 लाख रुपये के मकानों को ही अफोर्डेबल हाउस माना जाता है। जबकि इस समय महानगरों या बड़े शहरों में 45 लाख रुपये में आपको ढंग का दो कमरे का मकान नहीं मिलेगा। साल 2017 के बाद इस परिभाषा में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि निर्माण सामग्री के साथ ही आवासीय भूमि के दाम में काफी बढ़ोतरी हो चुकी है।लेखक के बारे में शिशिर चौरसिया शिशिर कुमार चौरसिया, नवभारत टाइम्स डिजिटल में बिजनेस एडिटर हैं। वह 26 से भी ज्यादा वर्षों से रेलवे, रोड, एविएशन के साथ-साथ फाइनेंस मिनिस्ट्री समेत अन्य मिनिस्ट्री की आर्थिक गतिविधियों को कवर कर रहे हैं। शिशिर पिछले 5 वर्षों से NBT (Digital) के साथ काम कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर ग्रुप के पिंक पेपर बिजनेस भास्कर, न्यूज एजेंसी यूनीवार्ता, राजस्थान पत्रिका और दिव्य हिमाचल जैसे अखबारों में काम किया है। उन्होंने रेलवे, राजमार्ग, शिपिंग की कई राज्यों की परियोजनाओं की ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। उन्होंने रेलवे और टैक्शेसन पर कई विशेष सीरीज़ को चलाने में भी अपनी विशेषज्ञता दिखाई है। इस समय भी वह 'धन की बात' नाम से एक साप्ताहिक वीडियो इंटरव्यू कर रहे हैं जो आम आदमी के पर्सनल फाइनेंस और टैक्शेसन पर केंद्रित होता है। उन्होंने भागलपुर विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एम.ए (Gold Medalist), IIMC (New Delhi Campus) से पत्रकारित में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से जनसंचार में एम.ए. की उपाधि हासिल की है।... और पढ़ें
Source: Navbharat Times January 27, 2026 07:36 UTC