Bullet Train: घंटों में पूरा होगा पटना से दिल्ली-सिलीगुड़ी का सफर, बिहार में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार - News Summed Up

Bullet Train: घंटों में पूरा होगा पटना से दिल्ली-सिलीगुड़ी का सफर, बिहार में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार


डिजिटल डेस्क, पटना। Bihar Bullet Train बिहार में बहुप्रतीक्षित बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट एक बार फिर तेज़ी पकड़ता दिख रहा है। भारतीय रेलवे ने हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए सर्वे टीम का गठन कर दिया है और जल्द ही ज़मीनी काम शुरू होने की उम्मीद है।इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को लेकर राज्य में नई उम्मीदें जगी हैं, क्योंकि यह देश के पूर्वी और उत्तरी हिस्से को तेज़ रफ्तार रेल नेटवर्क से जोड़ देगा। जुलाई-अगस्त से शुरू होगा सर्वे, बनेगी डीपीआर रेलवे हाईस्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड इस पूरे प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा रहा है। जानकारी के मुताबिक जुलाई-अगस्त 2026 से सर्वे का काम शुरू होगा और इसी वित्तीय वर्ष में इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।इसके बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी, जिसके आधार पर आगे का निर्माण कार्य तय होगा। 744 किमी का हाई-स्पीड कॉरिडोर, कई बड़े शहर होंगे कनेक्ट प्रस्तावित रूट वाराणसी से शुरू होकर सिलीगुड़ी तक जाएगा, जिसकी लंबाई करीब 744 किलोमीटर होगी। यह कॉरिडोर बिहार के बक्सर, आरा, पटना, मोकामा, बेगूसराय और कटिहार जैसे प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगा। इसके जरिए दिल्ली से सिलीगुड़ी तक का लंबा सफर बेहद तेज़ और सुविधाजनक हो जाएगा। 300 किमी/घंटे की रफ्तार, घंटों का सफर मिनटों में इस बुलेट ट्रेन की अधिकतम गति 300 किलोमीटर प्रति घंटा प्रस्तावित है। दावों के मुताबिक वाराणसी से सिलीगुड़ी की यात्रा लगभग 2 घंटे 55 मिनट में पूरी हो जाएगी, जबकि दिल्ली से वाराणसी का सफर करीब 3 घंटे 50 मिनट में सिमट जाएगा। इससे यात्रियों के समय में भारी बचत होगी।650 किमी एलिवेटेड ट्रैक और 1900 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण परियोजना के तहत बिहार में करीब 650 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड ट्रैक बनाया जाएगा। इसके लिए लगभग 1900 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण की योजना है। साथ ही कई नदियों को पार करने के लिए विशेष टनल और ब्रिज स्ट्रक्चर भी तैयार किए जाएंगे।पटना में बिहटा के पास बन सकता है स्टेशन, सर्वे जारी पटना में स्टेशन को लेकर दो जगहों पर सर्वे किया गया है। शुरुआती योजना एम्स के पास स्टेशन बनाने की थी, लेकिन बाद में बिहटा के पास जगह को अधिक उपयुक्त माना गया।


Source: Dainik Jagran April 11, 2026 15:00 UTC



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