2020 में दिल्ली के आसपास आए 51 भूकंप नैशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) की वेबसाइट पर मौजूद डेटा के अनुसार, दिल्ली या उसके 200 किलोमीटर के दायरे में इस साल कुल 51 छोटे-मध्यम तीव्रता के भूकंप आए हैं। इनमें से कुछ का केंद्र दिल्ली, कुछ का उत्तराखंड और ज्यादातर का हरियाणा में रहा। इस साल यलो कैटेगरी यानी 4 से ज्यादा तीव्रता वाले कुल तीन भूकंप आए जिनमें से एक 29 मई (तीव्रता 4.5, केंद्र रोहतक), दूसरा 3 जुलाई (तीव्रता 4.7, केंद्र गुरुग्राम से थोड़ा दूर) और तीसरा 17 दिसंबर (तीव्रता 4.2, केंद्र रेवाड़ी) को आया।हिमालयन क्रस्ट में तनाव का दिख रहा असर? के सेन, निदेशक, वाडिया इंस्टिट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, देहरादूनदिल्ली में बन रहीं कैसी परिस्थितियां? भूकंप एक्सपर्ट डॉ. पी पांडे के अनुसार, भूकंप को लेकर कोई पूर्वानुमान नहीं हो सकता1 इन झटकों के पीछे तीन स्थितियां बन रही हैं। पहला यह है कि इस तरह के छोटे झटके कुछ समय तक लगातार आएंगे और फिर स्थिति सामान्य हो जाएगी। दूसरी स्थिति यह कि लगातार छोटे झटके आएं और फिर एक बड़ा भूकंप, लेकिन इस स्थिति में आमतौर पर पांच से सात छोटे भूकंप के बाद एक बड़ा भूकंप आ जाता है। तीसरी स्थिति यह बन रही है कि दिल्ली एनसीआर में आ रहे यह भूकंप किसी दूर के इलाके में आने वाले बड़े भूकंप के बारे में बता रहे हों।दिल्ली का बड़ा इलाका है भूकंप के लिहाज से संवेदनशील दिल्ली-एनसीआर भूकंप के जोन 4 में आता है। 2014 में नैशनल सेंटर ऑफ सिस्मेलॉजी (NCS) ने दिल्ली-एनसीआर की माइक्रो जोन स्टडी की थी। इसके मुताबिक राजधानी का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा जोन-5 में है, जो भूकंप को लेकर सबसे अधिक संवेदनशील है। इन हिस्सों में ज्यादा तैयारियां की जानी चाहिए। पुरानी बिल्डिंगों को भूकंप के लिए तैयार करने की जरूरत है।दिल्ली के इन इलाकों को ज्यादा खतरा दिल्ली-एनसीआर में कमजोर और फॉल्ट वाले इलाके इस प्रकार हैं: दिल्ली-हरिद्वार रिजमहेंद्रगढ़-देहरादून सबसरफेस फॉल्टमुरादाबाद फॉल्टसोहना फॉल्टग्रेड बाउंड्री फॉल्टदिल्ली-सरगोधा रिजयमुना रिवर लाइनामेंटगंगा रिवर लाइनामेंटकई इलाकों में बढ़ रही है स्ट्रेन एनर्जी IIT धनबाद में सीस्मोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड पी.के. खान कहते हैं, "कम तीव्रता के झटके बार-बार लगना एक बड़े भूकंप का संकेत है।" उन्होंने कहा कि पिछले दो साल में दिल्ली-एनसीआर ने रिक्टर स्केल पर 4 से 4.9 तीव्रता वाले 64 भूकंप देखे हैं। वहीं पांच से ज्यादा तीव्रता वाले भूकंप 8 बार आए। खान के मुताबिक, "यह दिखाता है कि इलाके में स्ट्रेन एनर्जी बढ़ रही है खासतौर से नई दिल्ली और कांगड़ा के नजदीक।" दिल्ली-हरिद्वार रिज पर भी हलचल हो रही है। वहां हर साल प्लेट में 44 मिलीमीटर का मूवमेंट देखने को मिल रहा है।
Source: Navbharat Times December 25, 2020 06:16 UTC