कैसे बनती है लिक्विड मेडिकल ऑक्सिजन लिक्विड मेडिकल ऑक्सिजन बनाने के कई तरीके हैं। सबसे ज्यादा आम तरीका है- ऑक्सिजन का सैपरेशन यानी वातावरण में मौजूद हवा से ऑक्सिजन को अलग करना। ऑक्सिजन का सैपरेशन एयर सैपरेशन यूनिट्स (ASUs) में होता है। ASUs से अर्थ उन प्लांट्स से है, जो बड़ी मात्रा में गैसों को हवा से अलग करते हैं। ASUs वातावरणीय हवा से शुद्ध ऑक्सिजन उत्पादित करने के लिए फ्रैक्शनल डिस्टिलेशन मेथड का इस्तेमाल करते हैं। वातावरण की हवा में 78 फीसदी नाइट्रोजन और 21 फीसदी ऑक्सिजन होती है, बाकी 1 फीसदी में आर्गन, कार्बन डाई ऑक्साइड, नियोन, हीलियम और हाइड्रोजन गैसें होती हैं।फ्रैक्शन डिस्टिलेशन मेथड क्या है? इस प्रक्रिया में हवा को सबसे पहले मेन एयर कंप्रेसर में भेजा जाता है, उसके बाद इसे क्लीन अप सिस्टम से गुजारा जाता है जहां मॉइश्चर, कार्बन डाई ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन्स को अलग किया जाता है। इसके बाद प्राप्त हुई हवा को हीट एक्सचेंजर्स से गुजारा जाता है जहां यह क्रायोजेनिक टेंपरेचर पर ठंडी होती है। वातावरण की हवा को 181 डिग्री सेल्सियस पर ठंडा किया जाता है। इस पॉइंट पर ऑक्सिजन लिक्विड में बदल जाती है लेकिन नाइट्रोजन गैस फॉर्म में ही रहती है क्योंकि उसका बॉइलिंग पॉइंट 196 डिग्री सेल्सियस है। लेकिन आर्गन गैस भी काफी हद तक लिक्विड बन जाती है क्योंकि उसका बॉइलिंग पॉइंट 186 डिग्री सेल्सियस है। इसके बाद यह हाई प्रेशर डिस्टिलेशन कॉलम में जाती है। डिस्टिलेशन कॉलम के टॉप में नाइट्रोजन की भाप मिलती है और बॉटम में क्रूड ऑक्सिजन मिलती है। लिक्विड फॉर्म में आ चुकी ऑक्सिजन और आर्गन के मिश्रण को आगे के प्योरिफिकेशन के लिए छानकर, डिकंप्रेस कर सेकंड लो प्रेशर डिस्टिलेशन वैसल से गुजारा जाता है, जहां यह तब तक डिस्टिल्ड होती है जब तक कमर्शियल स्पेसिफिकेशंस को पूरा न कर ले। इसके बाद शुद्ध लिक्विड ऑक्सिजन मिलती है। लिक्विड ऑक्सिजन को क्रायोजेनिक स्टोरेज टैंक में भेजा जाता है और फिर क्रायोजेनिक कंटेनर्स में ट्रान्सपोर्ट किया जाता है।
Source: Navbharat Times May 06, 2021 07:33 UTC