चीन स्थित अमेरिकी कंपनियों को लुभाने में जुटा भारत; दवा, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, लेदर से जुड़ी कंपनियों से बातचीत जारीनई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। चीन में काम कर रही जापानी कंपनियों को साधने के साथ-साथ वहां काम कर रही अमेरिकी कंपनियों को भी भारत लाने की कोशिश तेज हो गई हैं। पिछले महीने चीन में काम करने वाली लगभग 1,000 अमेरिकी कंपनियों के साथ संपर्क साधने की कोशिश शुरू हुई है। कोरोना महामारी के मामले में अमेरिका और चीन के बीच शीत युद्ध जैसी स्थिति हो गई है। चीन के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख को देखते हुए चीन में काम कर रही सैकड़ों अमेरिकी कंपनियों के चीन से निकलने की उम्मीद की जा रही है।सूत्रों के मुताबिक सरकार चीन में काम कर रही अमेरिकी कंपनियों की पेरेंट कंपनी से संपर्क में है। मंत्रालय स्तर पर उनसे संपर्क किए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक इन कंपनियों को भारत में अपनी मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगाने पर इनसेंटिव देने की पेशकश की जा रही है। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक चीन से शिफ्ट होने वाली अमेरिकी कंपनियां भारत के अलावा अन्य देशों में भी अपनी संभावनाएं तलाश करेंगी। लेकिन भारत इस मौके का पूरा फायदा लेने के लिए अभी से अमेरिकी कंपनियों के संपर्क में हैं।भारत दवा, ऑटो पार्ट्स, फूड प्रोसेसिंग, मेडिकल उपकरण, टेक्सटाइल, लेदर जैसे क्षेत्रों में विश्व स्तर का मैन्यूफैक्चरिंग हब बनना चाहता है। इसलिए संपर्क साधने की कवायद में इन क्षेत्रों से जुड़ी कंपनियों को प्राथमिकता दी जा रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कोरोना के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराए जाने के बाद तेजी से वैश्विक माहौल बदलता जा रहा है।जापान पहले ही चीन में काम कर रही अपनी कंपनियों को वहां से शिफ्ट होने के लिए 220 करोड़ डॉलर यानी करीब 17,000 करोड़ रुपये की मदद की घोषणा कर चुका है। यूरोप भी सप्लाई चेन के लिए चीन पर अपनी निर्भरता कम करने का एलान कर चुका है।गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य चीन में काम कर रही जापानी कंपनियों को भारत लाने की कोशिश में पहले ही जुट चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार अब जापान व अमेरिका दोनों देशों की कंपनियों की जरूरत के हिसाब से अपनी नीति बना सकती है या पहले से बनी नीति में बदलाव कर सकती है।सरकार ने वर्ष 2022 तक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में मैन्यूफैक्चरिंग की हिस्सेदारी को 15 फीसद से बढ़ाकर 25 फीसद तक ले जाना चाहती है। जापान और अमेरिका की मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों को भारत में लाकर इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।Posted By: Manish Mishraडाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस
Source: Dainik Jagran May 08, 2020 03:00 UTC