डिजिटल डेस्क,जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में पीएम ऊषा योजना के अंतर्गत छात्रों और शिक्षकों में सॉफ्ट स्किल विकसित करने के लिए स्वीकृत 75 लाख रुपए की राशि को बचाने के लिए छल-कपट किया जा रहा है। डेढ़ साल तक सॉफ्ट स्किल कंपोनेंट के तहत कोई ठोस कार्यक्रम संचालित नहीं किया गया और अब 31 मार्च के पहले अनेक कार्यक्रमों की शृंखला करने की तैयारी है।इसके तहत 50 लाख रुपए का वर्क ऑर्डर भी जारी किया गया है। पूर्व में आवंटित 5 लाख रुपए की राशि समय पर उपयोग न होने के कारण लैप्स हो चुकी है और यही कारण है कि विवि ऐन-केन-प्रकारेण यह राशि हथियाना चाह रहा है। पिछले दिनों राजभवन से पत्र जारी किया गया था और रादुविवि की प्रगति को असंतोषजनक बताते हुए अविलंब कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और मध्य फरवरी में अब लगभग 50 लाख रुपए के विभिन्न कार्यक्रमों के कार्यादेश जारी किए गए हैं। वर्ष भर में चरणबद्ध तरीके से आयोजित किए जाने वाले सेमिनार, वर्कशॉप और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अब एक माह के भीतर समेटने की तैयारी है।परीक्षा सत्र निकट होने और छात्रों के प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में व्यस्त रहने के बीच इतने कम समय में सॉफ्ट स्किल कार्यक्रमों का अपेक्षित लाभ मिल पाना सवालों के घेरे में है। वहीं शिक्षक परीक्षा संबंधी कार्यों में व्यस्त हैं, जिससे वे भी इन आयोजनों में पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाएंगे।दूसरी एजेंसियों की सेवाएं लेंगेविश्वविद्यालय प्रशासन ने निर्णय लिया है कि पीएम ऊषा के अंतर्गत कार्यक्रमों का संचालन अब आउटसोर्सिंग के माध्यम से किया जाएगा। क्रिस्प और सेडमैप के सहयोग से कार्यक्रम आयोजित करने की बात सामने आई है। यह पहली बार है जब विश्वविद्यालय स्वयं कार्यक्रम संचालित करने की बजाय बाहरी एजेंसियों के माध्यम से कार्यक्रम आयोजित करेगा।सुबह प्रशिक्षण हुआ जबकि वर्क ऑर्डर शाम को जारी हुआइस पूरे मामले में चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है। 16 फरवरी को राजनीति विज्ञान विभाग में ट्रांसलेशन स्टडीज कार्यक्रम का आयोजन प्रातः काल से शुरू हो गया था, जबकि संबंधित कार्यादेश उस दिन शाम को जारी किया गया। चूंकि राशि का उपयोग 31 मार्च 2026 से पूर्व करना अनिवार्य है। इसलिए विश्वविद्यालय में अब ऐसे चौंकाने वाले कई मामले सामने आएंगे।
Source: Dainik Bhaskar February 19, 2026 15:31 UTC