सौरभ सोनी, नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश में जलवायु अनुकूल संपीड़ित स्थिर मिट्टी के ब्लाक (सीएसईबी) से प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास बनाए जाएंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने प्रत्येक ब्लाक में न्यूनतम 50 आवास इसी तकनीक से बनाने का लक्ष्य रखा है। इन ब्लाक को स्थानीय तौर पर उपलब्ध मिट्टी में थोड़ी मात्रा में सीमेंट या चूना मिलाकर तैयार किया जाता है। चूंकि, इसके बाद पकी हुई ईंट की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे निर्माण लागत में कमी आती है।पर्यावरण पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। इस तकनीक से निर्मित आवास, पारंपरिक ईंटों की तुलना में 20-30 प्रतिशत कम ऊर्जा की खपत के साथ आरामदायक होते हैं, जिससे वे जलवायु-अनुकूल विकल्प बनते हैं। सीएसईबी तकनीक जैसे उपायों में परंपरा और नवाचार का मेल देखा जा सकेगा।अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीकी का उपयोग अन्य कई देशों में किया जा रहा है। मध्य प्रदेश के 24 जिलों में पीएम जनमन योजना अंतर्गत 1.85 लाख स्वीकृत आवासों में से 1.34 लाख यानी 72.04 प्रतिशत आवास बनकर तैयार हो गए हैं और 51 हजार आवास अभी भी अपूर्ण हैं, जिन्हें मार्च 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। पीएम जनमन योजना के अंतर्गत बनाए जाने वाले मकानों में भी यह नवाचार देखने को मिलेगा। त्रिपुरा में किया जा चुका है प्रयोग त्रिपुरा में इस तरह का प्रयोग किया जा चुका है। इस तकनीक के तहत बने आवासों में स्थिरता के लिए बांस की छतें बनाई जाती हैं, जिसका जीवनकाल 75 वर्ष तक रहता है। यह टिकाऊ मकान देने के साथ ही स्थानीय उपलब्ध संसाधनों का उपयोग भी सुनिश्चित करता है, जो सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप है।
Source: Dainik Jagran January 28, 2026 08:50 UTC