हल्की-फुल्की बारिश हो तो फायदा केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ के निदेशक डा. शैलेंद्र राजन का कहना है कि कुछ दशक पूर्व, यदि जून में बारिश होती थी तो केवल 3-4 से फुहारे आम के बाग का मौसम खुशनुमा बना देती थी। लेकिन पिछले दशक से ही मौसम में परिवर्तन आना प्रारंभ हो गया है और विभिन्न कारणों से मई और जून में भी कई बार बारिश होने लगी। विगत 2 वर्षों से देखा गया है कि जून के महीने में लगभग 8 बार बारिश हुई। इतना ही नहीं बारिश की मात्रा भी काफी अधिक थी। खेतों में पानी भर गया और वातावरण में नमी की अधिकता हो गई।अधिक वर्षा वाले इलाकों के आम की क्वालिटी अच्छी नहीं सामान्यतः आम की क्वालिटी समुद्र तटीय क्षेत्रों एवं अधिक वर्षा वाले स्थानों पर अच्छी नहीं होती है। पकने के दौरान आम पर कई बार होने वाली वर्षा आम की क्वालिटी के लिए उपयुक्त नहीं होती। शायद यही कारण है कि लखनऊ और जिन स्थानों पर उत्तम कोटि के काम पैदा होते हैं, वहां फल के पकने के दौरान सामान्यतः वर्षा कम होती है। इसी तरह बिहार में भागलपुर, मुंगेर आदि इलाकों में पैदा होने वाले मालदह आम का स्वाद अनूठा होता है।ज्यादा बारिश तो घट जाती है मिठास वर्षा अधिक होने के कारण आम में मिठास लगभग 30-40 फीसदी तक घट जाती है। हां, ज्यादा बारिश से देखने में फल रसीले जरूर लगते हैं, परंतु मिठास में कमी होती है। दशहरी को आमतौर पर चौसा और लखनऊआ के मुकाबले बारिश कम पसंद है। दो से तीन बार होने वाली बारिश से दशहरे की क्वालिटी में सुधार जरूर आता है, लेकिन जब इस बारिश की संख्या 5 से ऊपर हो जाती है तो तरह-तरह की समस्याएं होने लगती है। आम का रंग भी वैसा नहीं हो पाता है जो कि बिना बारिश वाले मौसम में होता है।अधिक नमी से फल हो जाते हैं संक्रमित अधिक नमी की अवस्था में एंथ्रेक्नोज और डिप्लोडिया जैसी बीमारियां फल को संक्रमित करती हैं। वातावरण में अनुकूल तापक्रम और नमी के करण बीमारियों के बीजाणु अधिक संख्या में वातावरण में फैल जाते हैं। बागों में संक्रमण बढ़ने से फल तोड़ने के बाद जल्दी सड़ने लगते हैं अतः उन्हें अधिक दिन तक नहीं रखा जा सकता है। जबकि वर्षा रहित गर्मी के मौसम में तैयार हुए फल खाने में स्वादिष्ट, देखने में अधिक रंगीन और तोड़ने के बाद अधिक दिन तक रखे जा सकते हैं।फलों के अंदर खराबी भी दशहरी और कई किस्मों में यह भी पाया गया है कि आम का फल ऊपर से हरा और साबुत दिखता है, परंतु काटने पर गुठली के पास का भाग गलन रोग से प्रभावित हो जाता है। फल के गूदे में पकने के बाद दृढ़ता कम हो जाती है। गुठली के पास से होने वाली गलन समस्या इस वर्ष कुछ अधिक पाई गई है। आमतौर पर यह समस्या देरी से तोड़ी गई दशहरी में पाई जाती है। कुछ वर्ष पूर्व जब दशहरी की क्वालिटी बेहतरीन होती थी उस समय भी देर से तोड़े गए फलों में गलन की समस्या पाई जाती रही है।इस वर्ष जल्दी पक गए फल इस वर्ष के असामान्य मौसम (Unseasonal Rain) के कारण आम की कई किस्में बहुत जल्दी फल पकने लगी हैं। जो किस्में पहले जुलाई में पकती थी, वह जून में ही तैयार हो गई है। लेकिन क्वालिटी में गिरावट आई है। असामान्य वर्षा के वितरण के कारण आम की फसल के जल्दी समाप्त होने के आसार हैं। देर से पकने वाली किस्में जिन पर वर्षा का कम असर होता था वह भी देखने में अनाकर्षक हो गई है।
Source: Navbharat Times July 02, 2021 01:41 UTC