अपशकुन के लक्षणों और अनहोनी की आशंका के बीच बड़े दिन बाद धृतराष्ट्र का दरबार लगा. कथा कामरूप प्रदेश की है जहां तीन महीनों से बलवा मचा है. लाखों की संख्या में लोग शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं. दूसरी तरफ हुड़कचुल्लू मीडिया रेत और पिसान को आपस में सानने में लगा रहा. इसके पास अपने ही एक संपादक द्वारा लिखे गए एक लेख का रिजाइंडर प्रकाशित करने का साहस नहीं है.
Source: Dainik Jagran July 26, 2023 05:36 UTC